Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

राधे! कृष्णेर उद्देशे यबे गेनु मोरा

राधे! (संवाद शुन) कृष्णेर उद्देशे, यबे गेनु मोरा धनिष्टा आइल वने रसाला सुपेय, सुखाद्य लैया कृष्णे दिल सुयतने
अर्थ

हे राधे! (समाचार सुनिए) जब हम कृष्ण को खोजने गईं, तब धनिष्ठा वन में आईं और स्वादिष्ट फलों का रस और अच्छे व्यंजन लाकर बड़े यत्न से कृष्ण को दिए।

रसाला सेविया, बलदेव बले तुमि राख धेनु-पाल यत सखा-गण, तोमारे सेविबे आमि गेले अन्तराल
अर्थ

रस पीकर बलदेव बोले, "तुम गौओं के रखवालों को सँभालो। सब सखा तुम्हारी सेवा करेंगे, और मैं थोड़ी देर के लिए आगे चला जाऊँगा...

वने वने याञा, वृक्ष-तले तले देखिब प्रकृति शोभा निर्जन कानने, बड सुख पाइ मुनि-जन मन लोभा
अर्थ

"...वन-वन, पेड़-पेड़ के नीचे घूमकर मैं प्रकृति की शोभा देखूँगा। निर्जन कानन में मुझे बड़ा सुख मिलता है, जो मुनियों के मन को भी लुभाता है...

मध्याह्ना-वसाने, तोमार चरणे आसिब अवश्य आमि सकले लैया, गोष्ठेते यैब शिङ्गा बाजैबे तुमि
अर्थ

"...मध्याह्न ढलते ही मैं अवश्य तुम्हारे पास लौट आऊँगा। सबको लेकर हम गोष्ठ चलेंगे, और तुम सींग बजाना।"

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
सेवा लालसा
पद
4