राधे! प्रत्युषे तोमार सुगन्धि सलिले
हे राधे! भोर में मैं सुगन्धित जल से आपका चन्द्र-मुख धुलाऊँगी, सुगन्धित तेल से उबटन लगाकर आपको स्नान कराऊँगी।
आपका संकेत समझकर श्रीरूप-मंजरी आपको सुन्दर वस्त्र पहनाएँगी। ललिता के आदेश पर मैं तरह-तरह के आभूषणों से आपको सजाऊँगी।
मैं आपके चरणों में आलता, माँग में सिन्दूर और माथे पर तिलक लगाऊँगी। वह रूप देखकर, आनन्द में डूबकर, मैं आपके चरणों में पड़ी रहूँगी।
सब सखियों के मिलने पर आपकी सभा में रस से भरी बातें होंगी। तभी यशोदा की आज्ञा से कुन्दलता सखी वहाँ आ पहुँचेंगी।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- सेवा लालसा
- भाव
- पद
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