Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

राधे! यावटे श्री रत्न मन्दिर माझे

राधे! यावटे… श्री-रत्न-मन्दिर माझे, बड खट्ट सु-विराजे ताहे तल्प अति मनोहर अरुण उदय यबे, तोमारेत लये तबे शोयाइब श्री-खट्ट उपर
अर्थ

हे राधे! यावट में, रत्नों के मन्दिर के बीच, एक बड़ा पलंग शोभा पा रहा है और उस पर अति मनोहर शय्या है। जब अरुणोदय होगा, तब मैं आपको लेकर उस सुन्दर पलंग पर सुला दूँगी।

निशा कथा नाहि आने, कोन परकारे जाने एहत भावना सखी-कुले निज निज गृहे याबे, ए दासी शुइबे तबे पौर्णमासी रहिबे व्याकुले
अर्थ

रात की बात कोई नहीं छेड़ता; दूसरों के जानने से क्या लाभ? सखियों का यही भाव है। सब अपने-अपने घर जाएँगी, तब यह दासी भी सो जाएगी। पौर्णमासी व्याकुल रहेंगी।

कुञ्ज-लीला हबे गुप्त, सकले रहिबे सुप्त प्राते रवि उदिबे यखन उठिबे ए विधिकरी, गृह-मार्ज्जनादि करि वस्त्र सब राखिबे तखन
अर्थ

कुंज-लीला छिपी रहेगी और सब सोते रहेंगे। सुबह जब सूर्य उगेगा, तब यह दासी विधि के अनुसार उठकर घर बुहारने आदि के काम करेगी और सारे वस्त्र सँभालकर रखेगी।

कुञ्ज-लीला स्मृति रसे, डुबिया प्रेमेर वशे, हा राधे हा राधे फुकारिब अवश हैबे देह, ना बुझिबे चित्त केह तुया निद्रा-भङ्ग कराइब
अर्थ

कुंज-लीला की स्मृति के रस में, प्रेम के वश डूबकर, मैं "हा राधे! हा राधे!" पुकारूँगी। देह बेसुध हो जाएगी, और मेरे मन को कोई नहीं समझ पाएगा। फिर मैं आपकी नींद तोड़ूँगी।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
सेवा लालसा
पद
4