वास वेश अलङ्कार
रात की लीलाओं से उनके वस्त्र, वेश, अलंकार, केश और अलकें सब अस्त-व्यस्त हो गए हैं। सखी के इशारे पर यह दासी सब कुछ ठीक से सँवारने में लग जाएगी।
मैं कृष्ण को उनका पीला वस्त्र दूँगी और आपकी नीली साड़ी लेकर बड़े यत्न से आपको पहनाऊँगी। आपका मुख पोंछकर, माँग में सिन्दूर भरकर, मैं आपको श्रीनन्दनन्दन को दिखाऊँगी।
आपके वक्ष पर नख का चिह्न है; मैं उसे पोंछकर हल्का करूँगी और उस पर चन्दन लगाऊँगी। उस समय कृष्ण सुखी होंगे, और ओट से यह देखकर मुझे भी सुख मिलेगा। फिर मैं कृष्ण के हाथ में वंशी थमा दूँगी।
घर की ओर चलते हुए दोनों बड़े सुख से चलेंगे, तरह-तरह की बातों और विनोद की लहरों में। राह में बिछोह होगा; तब मैं आपको लेकर चलूँगी, और सब सखियाँ आनन्द से आपके घर जाएँगी।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- सेवा लालसा
- भाव
- पद
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