Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

वास वेश अलङ्कार

वास-वेश-अलङ्कार, कुन्तल अलका आर निशा-रङ्गे सब विपर्यन्त सखीर इङ्गिते करे, ए दासी नियुक्ता हरे यथायथ करिते विन्यन्त
अर्थ

रात की लीलाओं से उनके वस्त्र, वेश, अलंकार, केश और अलकें सब अस्त-व्यस्त हो गए हैं। सखी के इशारे पर यह दासी सब कुछ ठीक से सँवारने में लग जाएगी।

पीत-वस्त्र कृष्णे दिब, नील साडी खुले लब तोमारेत पराव यतने तुया मुख मुच्छाइया, सिँताय सिन्धुर दिया देखाइब श्री-नन्द-नन्दने
अर्थ

मैं कृष्ण को उनका पीला वस्त्र दूँगी और आपकी नीली साड़ी लेकर बड़े यत्न से आपको पहनाऊँगी। आपका मुख पोंछकर, माँग में सिन्दूर भरकर, मैं आपको श्रीनन्दनन्दन को दिखाऊँगी।

तुया वक्षे नख-चिन, पुच्छिया करिब हीन तद्-उपरि चन्दन चर्च्चिब से समये कृष्ण-सुख, आडे देखे पाब सुख कृष्ण-करे वांशि तुलि दिब
अर्थ

आपके वक्ष पर नख का चिह्न है; मैं उसे पोंछकर हल्का करूँगी और उस पर चन्दन लगाऊँगी। उस समय कृष्ण सुखी होंगे, और ओट से यह देखकर मुझे भी सुख मिलेगा। फिर मैं कृष्ण के हाथ में वंशी थमा दूँगी।

गृहे यात्रा अभिमुखे, दुजने चलिबे सुखे नाना कथा कौतुक तरङ्ग पथिते विच्छेद हबे, तुहु लये याब तबे सब सखी तुया गृहे रङ्गे
अर्थ

घर की ओर चलते हुए दोनों बड़े सुख से चलेंगे, तरह-तरह की बातों और विनोद की लहरों में। राह में बिछोह होगा; तब मैं आपको लेकर चलूँगी, और सब सखियाँ आनन्द से आपके घर जाएँगी।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
सेवा लालसा
पद
4