Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

रम्य तिलक नव तुलसी दल भर वन मलति विकसी

रम्य-तिलक-नव-तुलसी-दल-भर-वन-मलति-विकसी निज-सौरभ-वश-मधुप-गीतम् अनुगयति वेणु-विलसी
अर्थ

कृष्ण सुन्दर तिलक और नई तुलसी-दलों तथा वन के फूलों की मालाओं से शोभायमान हैं। बाँसुरी बजाते हुए वे उन भौंरों की गुंजार के साथ स्वर मिलाते हैं, जो उनके दिव्य रूप की मधुर सुगन्ध से मतवाले हो गए हैं।

अथ सरस-युत-हंसयुत-ततिर् अलम् अनुगम्य परीत परितो न्यविशत तम् अविशती रुतिम् इह य हरि-गीत
अर्थ

हंसों और सारसों का एक विशाल झुंड उनके पीछे चला और उन्हें चारों ओर से घेर लिया। पक्षियों का कलरव कृष्ण की बाँसुरी की ध्वनि के साथ मिलकर एक मधुर सुर-मेल बन गया।

इस भजन के बारे में

पद
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