सखी गण मेलि ये करल
सखियाँ सब मिलकर एकत्र हुईं और चल पड़ीं; क्रीड़ा के लिए वे आनंद-सरोवर में स्नान करने गईं।
एकत्रित सखियाँ जल में उतरीं; दोनों वहाँ चंचल जल-युद्ध में रत हो गए।
उसके केश बिखर गए और अंग पूरी तरह थक गए, फिर भी उस घमासान युद्ध में उसने नायक कृष्ण को हरा दिया।
तब सखियों ने चंद्र-सम उस नायक को चारों ओर से घेर लिया; यह देखकर गोविन्द दास चकित होकर मुग्ध रह जाते हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- गोविन्द दास कविराज · जीवनी पढ़ें
- पद
- 4