Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

सनातन मिश्रेर भबने

सनातन मिश्रेर भबने ये मङ्गल-क्रिया ता कहिते केबा जाने
अर्थ

सनातन मिश्र के घर जो शुभ विधियाँ हो रही हैं, उनका वर्णन भला कौन कर सकता है?

बाजे नाना बाद्य शोभमय उथले आनन्द-कोलाहल अतिशय
अर्थ

अनेक प्रकार के वाद्य सुन्दर ढंग से बज रहे हैं। आनन्द का भारी कोलाहल सब ओर उमड़ पड़ा है।

बन्धु-गण सने सनातन आगु-सरि आसे निते जामाता-रतन
अर्थ

अपने बन्धु-जनों के साथ सनातन मिश्र प्रवेश करते हैं। वे अपने रत्न-समान दामाद, प्रभु गौर के साथ बैठते हैं।

जामाता कि मनोहर साजे झलमल करे दिब्य चतुर्-दोल माझे
अर्थ

उनके दामाद कितने मनोहर हैं! पालकी पर बैठे हुए वे शोभायमान हैं।

चतुर्-दिके ब्राह्मण सज्जन असङ्ख्य लोकेर भिदे ना याय गणन
अर्थ

चारों दिशाओं में ब्राह्मणों और भक्तों की भीड़ है। अनगिनत अतिथि आए हैं। कोई उन सबको गिन नहीं सकता।

करे हाते हात अन्ध दाण्डा-इया रहये ये-दिके गौरचन्द्र
अर्थ

हाथ में हाथ थामे नेत्रहीन लोगों की टोली आती है। वे प्रभु गौरचन्द्र के सामने खड़े हो जाते हैं।

पङ्गु-गण राज-पथे आसि देखये मनेर साधे गोरा-रूप-राशि
अर्थ

पंगु लोगों की टोली राजपथ पर आती है। वे उत्सुक मन से प्रभु गौर के शोभामय सौन्दर्य को निहारते हैं।

येब के-उ चलिते ना पारे धरिया लगुड पथे आ-इसे धीरे धीरे
अर्थ

जिनमें चलने की शक्ति भी नहीं थी, वे भी लाठी थामे धीरे-धीरे राह पर चलकर आए।

केबा नाहि गोरा-गुण गाय ना जानये कत सुख बाढये हियाय
अर्थ

कौन था जिसने प्रभु गौर के गुण नहीं गाए? किसके हृदय में आनन्द नहीं भर आया?

नाना बाद्य बाजे नाना छान्दे नाचे बाल बृद्ध के-उ थिर नाहि बान्धे
अर्थ

अनेक प्रकार के वाद्य अनेक छन्दों में बज रहे हैं। बालक और वृद्ध नाच रहे हैं। कोई भी शान्त नहीं है।

कत शत महा-दीप ज्वले धरणी छा-इल आलो गगन मण्डले
अर्थ

कितने ही सैकड़ों बड़े दीपक जगमगा रहे हैं! आकाश और धरती प्रकाश से भर गए हैं।

केह कुल-रङ्ग प्रकाशय ब्यापये सकल मही-तले याहा हय
अर्थ

हर कोई आनन्दित है। अतिथि पूरे क्षेत्र में भर गए हैं।

मिश्र महा उल्लसित मने जामाता ल-इया कोले प्रबेशे भबने
अर्थ

प्रसन्न मन से सनातन मिश्र अपने दामाद को गले लगाकर घर के भीतर ले जाते हैं।

अपूर्ब आसने बसा-इया करे पुष्प-बृष्टि चान्द-मुख-पाने चाञा
अर्थ

वे प्रभु गौर को एक अनुपम आसन पर बैठाते हैं। उन पर फूलों की वर्षा करते हैं। उनके चन्द्रमा के समान मुख को निहारते हैं।

जय जय ध्वनि अनिबार बादाबादि बय बाद्य बादक दोँहार
अर्थ

सब लोग बिना रुके “जय! जय!” पुकारते हैं। वादक अपने वाद्य बजाते हैं।

मिश्र करे जामाता बरण नरहरि ताहा देखि जुडाय नयन
अर्थ

सनातन मिश्र विधिपूर्वक अपने दामाद का स्वागत करते हैं। यह सब देखकर नरहरि के नेत्र शीतलता देने वाले आनन्द से भर जाते हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
16