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“दामोदर” के परिणाम

42 भजन · 101 पद भजन के शब्दों में

71 पद भजन में 2

बिल्वमंगल ठाकुर

  • पद 1भजन
    अग्रे कुरूणाम् अथ पाण्डवानां
    दुःशासनेनाहृत-वस्त्र-केशा
    कृष्णा तदाक्रोशद् अनन्य-नाथा
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 2भजन
    श्री कृष्ण विष्णो मधु-कैटभारे
    भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे
    त्रायस्व मां केशव लोकनाथ
    गोविन्द दामोदर माधवेति
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  • पद 3भजन
    विक्रेतुकामा किल गोप-कन्या
    मुरारि-पादार्पित-चित्त-वृत्तिः
    दध्यादिकं मोहवशाद् अवोचद्
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 4भजन
    उलूखले सम्भृत-तन्डुलांश् च
    सङ्घट्टयन्त्यो मुसलैः प्रमुग्धाः
    गायन्ति गोप्यो जनितानुरागा
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 5भजन
    काचित् कराम्भोज् अ-पुटे निषण्णं
    क्रीडा-शुकं किंशुक-रक्त-तुण्डम्
    अध्यापयाम् आस सरोरुहाक्षी
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 6भजन
    गृहे गृहे गोप-वधू-समूहः
    प्रति-क्षणं पिञ्जर-सारिकानाम्
    स्खलद्-गिरं वाचयितुं प्रवृत्तो
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 7भजन
    पर्य्यङ्किकाभाजम् अलम् कुमारं
    प्रस्वापयन्त्यो 'खिल-गोप-कन्याः
    जगुः प्रबन्धं स्वर-ताल-बन्धं
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 8भजन
    रामानुजं वीक्षण-केलि-लोलंगोपि
    ग्еहीत्वा नव-नीत-गोलम्
    आबालकं बालकम् आजुहाव
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 9भजन
    विचित्र-वर्णाभरणाभिरामे
    -भिधेहि वक्त्राम्बुज-राजःअंसे
    सदा मदीये रसने 'ग्र-रङ्गे
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 10भजन
    अङ्काधिरूढं शिशु-गोप-गूढं
    स्तनं धयन्तं कमलैक-कान्तम्
    सम्बोधयाम् आस मुदा यशोदा
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 11भजन
    क्रीडन्तम् अन्तर्-व्रजम् आत्मनं स्वं
    समं वयस्यैः पशु-पाल-बालैः
    प्रेम्णा यशोदा प्रजुहाव कृष्णं
    गोविन्द दामोदर माधवेति
  • पद 12भजन
    यशोदया गाढम् उलूखलेन
    गो-कण्ठ-पाशेन निबध्यमनम्
    रुरोद मन्दं नवनीत-भोजी
    गोविन्द दामोदर माधवेति
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3 पद भजन में 9

सत्यव्रत मुनि · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 2भजन
    रुदन्तं मुहुर् नेत्र-युग्मं मृजन्तम्
    कराम्भोज-युग्मेन सातङ्क-नेत्रम्
    मुहुः श्वास-कम्प-त्रिरेखाङ्क-कण्ठ
    स्थित-ग्रैव-दामोदरं भक्ति-बद्धम्
  • पद 6भजन
    नमो देव दामोदरानन्त विष्णो
    प्रसीद प्रभो दुःख-जालाब्धि-मग्नम्
    कृपा-दृष्टि-वृष्ट्याति-दीनं बतानु
    गृहाणेष माम् अज्ञम् एध्य् अक्षि-दृश्यः
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  • पद 7भजन
    कुवेरात्मजौ बद्ध-मूर्त्यैव यद्वत्
    त्वया मोचितौ भक्ति-भाजौ कृतौ च
    तथा प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ
    न मोक्षे ग्रहो मे 'स्ति दामोदरेह
1 पद भजन में 6

भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 6भजन
    महाप्रभु श्री-चैतन्य, राधा-कृष्ण नहे अन्य,
    रूपानुग जनेर जीवन
    विश्वम्भर प्रियङ्कर, श्री-स्वरूप दामोदर,
    श्री-गोस्वामी रूप-सनातन
2 पद भजन में

रूप गोस्वामी

  • पद 41भजन
    वृत्ते दैवाद् व्रज-पति-सुहृन्-नन्दिनी-विप्रलम्भे
    संरम्भेणोल्ललित ललिता-शङ्कयोद्भ्रान्त-नेत्रः
    त्वं शारीभिः समय-पटुभिर् द्राग् उपालभ्यमानः
    कामं दामोदर मम कदा मोदम् अक्ष्णोर् विधाता
  • पद 58भजन
    त्वद्-आदेशं शारी-कथितम् अहम् आकर्ण्य मुदितो
    वसामि त्वत्-कुण्डोपरि सखि विलम्बस् तव कथम्
    इतीदं श्रीदाम-स्वसरि मम सन्देश-कुसुमं
    हरेति त्वं दामोदर जनम् अमुं नोत्स्यसि कदा
1 पद भजन में 1

व्यासदेव · और भजन

  • पद 11भजन
    श्रीवत्स-धामापर-रात्र ईशः
    प्रत्यूष ईशो ’सि-धरो जनार्दनः
    दामोदरो ’व्याद् अनुसन्ध्यं प्रभाते
    विश्वेश्वरो भगवान् काल-मूर्तिः
1 पद भजन में 1

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 2भजन
    श्री-देव-देव मधुसूदन शार्ङ्ग-पाणे
    दामोदरार्णव-निकेतन कैटभारे
    विश्वम्भराभरण-भूषित भूमि-पाल
    जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि