- पद 15भजनअथ वनमाली वर-विपिनाली-
कुञ्ज-निकेतन-वीक्षण-शाली
जयति विहारी निशि मणि-हारी
व्रज-तरुणी-गण-मानस-हारी - पद 16भजननत-जन-बन्धो जय रस-सिन्धो
वदनोल्लसित-श्रम-जल-बिन्दो
त्वम् अखिल-देवावलि-कृत-सेवा-
सन्ततिर् अधमा वयम् इह के वा
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- पद 17भजनजय जय कुण्डल-युग-रुचि-मण्डल-
वृत-गण्ड-स्थल दमिताखण्डल
धृत-गोवर्धन गोकुल-वर्धन
देहि रतिं मे त्वयि मुर-मर्दन