- पद 3भजनघन-तनु सुन्दर घोर-तिमिर-हर
घोषत यत घन-श्याम
चम्पक गौरी चित-हर चञ्चल
चतुर चतुर्-भुज नाम
“गौर आरती” के परिणाम
439 भजन · 566 पद भजन के शब्दों में · 472 पद अर्थ में
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1 पद भजन में
1 पद भजन में
- पद 4भजनछल छल करे आण्खि नयनेर जले
जगत पबित्र कैल गौर-कलेबरे
1 पद भजन में
- पद 1भजनश्री शचीतनयाष्टक
उज्ज्वल-वरण-गौर-वर-देहं
विलसित-निरवधि-भाव-विदेहम्
त्रि-भुवन-पावन-कृपायाः लेसां …
1 पद भजन में
- पद 14भजनकेह काल केह गौर सबाइ किशोर्
अङ्गेर किरण ताँर अति से उजोर्
1 पद भजन में
- पद 1भजनयषोदोत्सण्ग-पर्यण्कं
लीलाविष्कृत-गौरवम्
मतृ-विस्मय-कर्तरं
तृणावर्तापावाहितम्
1 पद भजन में
- पद 1भजनष्रिमच्-चैतन्यदेव त्वां
वन्दे गौराण्ग-सुन्दर
षची-नन्दन मां त्राहि
यति-चुडामणे प्रभो
1 पद भजन में
- पद 6भजननील-रुचि-चित-गौर-दुकुलम्
घन-चपलभिरुचम् इव मुलम्
1 पद भजन में
- पद 4भजनपैत्र-विमोषक-जैत्र-विदोषक-पशि-भय-भ्रम-नशि-जय-क्रमसन्तत-गो-कुल सन्तत-गोकुल-दर्शनय युत दर्शन-संस्तुतनग-सुदर्शन-भग-सुदर्शन रत्न-निपतन-यत्न-निघतन-तक्षित-यक्षक रक्षित-पक्षक तर्जद्-अरिष्टद-गर्जद्-अरिष्टदवेशित-सद्-भुज-केशि-तनु-रुज कंसक-मरण-शंसक-करण-सङ्गत तत्-पुर-रङ्गततः पुर एव वपुर्-हर देववद्-अम्बरसद्-वर-वयक-सद्-वर-दयक मलि-सुदमक-पलि-सुधमककुब्जि-वपुः-सदृग्-उब्जित-तद-धृग्-अङ्ग तद्-अर्पित-सङ्गत-कल्पित-चन्दन-रुषित-वन्दन-तुषित पृष्ठ-मख-स्थल सृष्ट-मह-बल
खण्डित-चपक दण्डित-शपक सङ्ग-परदिम रङ्ग-पदग्रिम-हस्ति-पदरक हस्तिप-मरक अंसग-दन्तक कंस-सद्-अन्तक-मल्ल-जन-क्रथ तल्लजम् उत्प्रथ मरित-कंसक तरित-शंसकप्रज्यदयहुक रज्यदयहुक जङ्गत यदव-सङ्गत-मधव-युक्ततयसजद्-उक्त-चयद् व्रज-यपित-ततक धपित-शतक-तन्-निजत-प्रथ सद्-द्विजत-व्रत-गौरव-भुमत गौरव-भु-गत-शस्त्र-कथञ्चित शस्त्र-कलञ्चित पञ्च-जनदर-सञ्चय-सुन्दरधर्म-नृपर्चित-शर्म-कृतञ्चित कल-वशं गुरु-बल-वपुः पुरुदक्षिनयन्न् अथ दक्षिण-सत्-पथ-सद्म-समगत सद्म-समयत-लोचन-बन्धुर-रोचन सन्धुर संस्मृत-गो-व्रज-सम्भृत-सुग्-व्रजतत्-प्रहितोद्धव तत्-प्रहितोद्धव-तच्-छ्रुत-शन्तिक सम्प्लुत-कन्तिक
दुत-समगम-भुत-शमशम-मगधयोधन-सवध-रोधन
1 पद भजन में
- पद 7भजनदूरे रहु गुरुजन-गौरब लाज
गोबिन्द-दास कह पड़ल अकाज
1 पद भजन में
- पद 3भजनलास्योल्लसद्-भुजग-शत्रु-पतत्र-चित्र-पट्ट्
आंशुकाभरण-कञ्चुलिकाञ्चिताङ्गीम्
गोरोचना-रुचि-विगर्हण-गौरिमाणं
देवीं गुणैः सुललितां ललितां नमामि
1 पद भजन में
- पद 1भजनगौरीम् गोष्ठवनेश्वरीम् गिरिधर-प्राणाधिक-प्रेयसीम्
स्वीय-प्राण-परार्ध-पुष्प-पटली-निर्मञ्छ्य-तत्-पद्धतिम्
प्रेम्णा प्राण-वयस्यया ललितया संलालिताम् नर्मभिः
सिक्ताम् सुष्ठु विशाखया भज मनो राधाम् अगाधाम् रसैः
1 पद भजन में
- पद 2भजनबेश बेशायल सबहि बिछुरल
चलली परिहरि मान
तेजल कुल-भय नाहि गौरब
मनहि जागल कान
1 पद भजन में
- पद 1भजनतप्त-काञ्चन-गौराङ्गि
राधे वृन्दावनेश्वरि
वृषभानु-सुते देवि
प्रणमामि हरि-प्रिये
1 पद भजन में
- पद 2भजनपत्रावलिम् इह मम हृदि गौरे
मृगमद-बिन्दुभिर् अर्पय शौरे
1 पद भजन में
- पद 3भजननील जलद तनु भानु मदन धनु
नयन-कमल पञ्च बाण
जर जर अन्तर कुलबती-गौरब
संशय रहल पराणे
1 पद भजन में
- पद 4भजनचन्द्रांशु-गौरैश् छुरितं तनूरुहैर्
विष्वग् भुजानीक-शतं नखायुधम्
दुरासदं सर्व-निजेतरायुध-
प्रवेक-विद्रावित-दैत्य-दानवम्
1 पद भजन में
- पद 3भजनकेबोल रसेर कूप अवतार सदाशिव साधे
अन्तरे नव-घन बाहिरे गौर तनु
1 पद भजन में
- पद 4भजनज्योत्स्नामोक्षण-माल्य-हार-सुमनो-गौरी-बलारि-ध्वज
गान्धर्वादि-सरांसि निर्झर-गिरिः शृङ्गार-सिंहासनम्
गोपालो 'पि हरि-स्थलं हरिर् अपि स्फूर्जन्ति यत्-सर्वतः
कस् तं गो-मृग-पक्षि-वृक्ष-ललितं गोवर्धनं नाश्रयेत्
1 पद भजन में
- पद 1भजनगौरभक्त-गण मध्ये सर्व अग्रगण्य
यार गुण गाइ काँदे आपने चैतन्य
1 पद भजन में
- पद 3भजनजोखोन गौर नित्यानन्द, अद्वैतादि भक्त वृन्द,
नदीया नगरे अवतार
तोखोन ना होइलो जन्म, एबे देहे किबा कर्म,
मिछा मात्र बोहि फिरि भार