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“जय राधा माधव” के परिणाम

536 भजन · 902 पद भजन के शब्दों में · 608 पद अर्थ में

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जयदेव गोस्वामी

  • पद 9भजन
    श्री-जयदेव-भणितम् अतिसुन्दर-मोहन-मधु-रिपु-रूपम्
    हरि-चरण-स्मरणं प्रति सम्प्रति पुण्यवताम् अनुरूपम्
  • पद 9अर्थ
    श्री जयदेव द्वारा रचित यह गीत मधु-दैत्य के शत्रु के अत्यंत सुंदर, मोहक रूप का वर्णन करता है। यह इसी क्षण पुण्यात्माओं के लिए हरि के चरणों का स्मरण करने योग्य है।
1 पद भजन में 1 पद अर्थ में

रूप गोस्वामी

  • पद 1भजन
    सुन्दरि माधवम् अवकलयालम्
    मित्र-कर-लोलया रत्नमय-दोलया चलित-वपुर् अति-चपल-मालम्
  • पद 1अर्थ
    हे सुंदरी, देखो, माधव अपने सखाओं के हाथों से झुलाए जा रहे रत्न-जड़ित झूले पर झूल रहे हैं। उनका शरीर डोल रहा है, और उनकी माला चंचल होकर हिल रही है।
1 पद भजन में 1 पद अर्थ में

रूप गोस्वामी

  • पद 1भजन
    वारय माधव-मुद-वदनाङ्गम्
    स्पृशति यथायं न सखि मद्-अङ्गम्
  • पद 1अर्थ
    हे सखी, आनन्द से दमकते मुख वाले माधव को रोको, कहीं वे मेरे शरीर का स्पर्श न कर बैठें।
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जयदेव गोस्वामी

  • पद 9भजन
    हरि-चरण-शरण-जयदेव-कवि-भारती
    वसतु हृदि युवतिर् इव कोमल-कलावती
  • पद 9अर्थ
    हरि के चरणों की शरण लेनेवाले कवि जयदेव की यह काव्य-वाणी तुम्हारे हृदय में वैसे ही बसे, जैसे कोमल और कलाओं में निपुण कोई युवती बसती है।
1 पद भजन में

नरहरि दास · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय जय जय मङ्गल-रब, फाल्गुन-पूर्णिमा-निशि नब शोभित
    शची-गर्भे प्रकट गौर बरज-रण्जना
    झलकत बर बालक-तनु, कुङ्कुम थिर दामिनी जनु
    चमकत मुख-चन्द मधुर धैरज भर भण्जना
1 पद भजन में

नरोत्तम दास ठाकुर · प्रेम-भक्ति-चन्द्रिका

  • पद 1भजन
    राधा-कृष्ण कोरो ध्यान, स्वप्ने-ओ ना बोलो आन,
    प्रेम विना आन नाहि चाउ
    युगल किशोर प्रेम, येनो लक्ष-बाण हेम,
    आरति पिरीति रसे ध्याउ