Vaishnava Songs
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“गोविन्द” के परिणाम

219 भजन · 261 पद भजन के शब्दों में · 193 पद अर्थ में

1 पद भजन में

गुणराज खान · श्री कृष्ण विजय

  • पद 1भजन
    श्री वृन्दारण्येर् श्री योग-पीठे स-परिकार् श्री गोविन्देर्
    शुन शुन ओहे नर शुन साबधाने
    आर दिने आर क्रीडा कैल नारायणे
1 पद भजन में

रघुनाथ दास गोस्वामी

  • पद 2भजन
    पुरीदेवस्यान्तः-प्रणय-मधुना स्नान-मधुरो
    मुहुर् गोविन्दोद्यद्-विशद-परिचर्यार्चित-पदः
    स्वरूपस्य प्राणार्बुद-कमल-नीराजित-मुखः
    शची-सूनुः किं मे नयन-सरणीं यास्यति पुनः
1 पद भजन में

वृन्दावन दास ठाकुर

  • पद 2भजन
    गौर गोविन्द-गँअ शुन हे रसिक-जन
    बिष्ँउ महा-बिष्ँउ पर पहुं
    याँर पद-नख-द्युति परम ब्रह्मेर स्थिति
    सुर-मुनि प्राँएर गँअ तुहुं
1 पद भजन में

रघुनाथ दास गोस्वामी

  • पद 2भजन
    इन्द्रत्वे निभृतं गवां सुरनदी-तोयेन दीनात्मना
    शक्रेणानुगता चकार सुरभिर् येनाभिषेकं हरेः
    यत्-कच्छे 'जनि तेन नन्दित-जनं गोविन्द-कुण्डं कृती
    कस् तं गो-निकरेन्द्र-पट्ट-शिखरं गोवर्धनं नाश्रयेत्
1 पद भजन में

रघुनाथ दास गोस्वामी

  • पद 6भजन
    अनादृत्योद्गीताम् अपि मुनि-गणैर् वैणिक-मुखैः
    प्रवीणां गान्धर्वाम् अपि च निगमैस् तत्-प्रियतमाम्
    य एकं गोविन्दं भजति कपटी दाम्भिकतया
    तद्-अभ्यर्णे शीर्णे क्षणम् अपि न यामि व्रतम् इदम्
1 पद भजन में

रघुनाथ दास गोस्वामी

  • पद 10भजन
    दयां यो गोविन्दे गरुड इव लक्ष्मी-पतिर् अलं
    पुरी-देवे भक्तिं य इव गुरु-वर्ये यदुवरः
    स्वरूपे यः स्नेहं गिरिधर इव श्रील-सुबले
    विधत्ते गौराङ्गो हृदय उदयन् मां मदयति
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतावली

  • पद 3अर्थ
    हे मक्खन के चोर (नवनीत-चोर), हे दही चुराने में कुशल बालक (दधि-हरण-कुशल), हे यमल-अर्जुन वृक्षों को तोड़ने वाले प्रभु (यमलार्जुन-भञ्जी), हे गौओं, भूमि और इन्द्रियों को आनंद देने वाले प्रभु (गोविन्द), हे गौओं के रक्षक (गोपाल)!
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतावली

  • पद 1अर्थ
    हे सर्वाकर्षक प्रभु (कृष्ण), हे गौओं, भूमि और इन्द्रियों को आनंद देने वाले प्रभु (गोविन्द), हे समस्त अशुभ को हरने वाले प्रभु (हरि), हे गोपियों के प्रियतम (गोपी-वल्लभ), हे शूरसेन के वंशज (शौरि)!
1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतावली

  • पद 1अर्थ
    …हे गौओं की रक्षा करने वाले (गोपाल), हे गौओं, भूमि और इन्द्रियों को सुख देने वाले (गोविन्द), आपकी जय हो! हे कामदेव को भी मोहित करने वाले प्रभु (मदन-मोहन), हे सब अमंगल को दूर करने वाले (हरि), हे असीम प्रभु (अनन्त), हे मुक्ति देने वाले (मुकुन्द), आपकी जय हो!…