स्नेह रग मय तैल हरिद्र परिवलितं मुहुर् अचलम्
अनुराग भरे प्रेम के हल्दी-तेल से सदा लेपित...
...तरुण दिव्य युगल गोकुल के निवासियों की सदा रक्षा करें। वे उन्हें सबसे बड़े और सबसे गहरे आनन्द से भर दें।
...तरुण दिव्य युगल सदा दिव्य लीलाएँ करते रहें। वे भक्तों के हृदय मोह लें। वे भक्तों के दुःख दूर करें। वे अपनी सुन्दरता और तेज को प्रकट करें। वे अपनी महिमा के सूर्य को चमकने दें।
...तरुण दिव्य युगल अपनी सब महिमा और सब गुणों को प्रकट करें। वे भक्तों की आँखों को अपने चरणों का दान दें। वे भक्तों के दुःख सदा दूर करते रहें।
...तरुण दिव्य युगल अपने सुन्दर दिव्य रूपों के अमृत जैसे वैभव को प्रकट करें, जो सब जीवों के प्राण हैं। वे राजसी वैभव से शोभित हों। वे सबको आश्चर्य से भर दें।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- जीव गोस्वामी · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- गोपाल-चम्पू
- पद
- 5