Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

शोभामय शचीर अङ्गने

शोभामय शचीर अङ्गने चतुर्-दिके बेद-ध्वनि करे बिप्र-गणे
अर्थ

शची के सुन्दर आँगन में ब्राह्मण चारों दिशाओं को वेदों की ध्वनि से भर रहे हैं।

टेक
आजु कि आनन्द परकाश शुभ-क्षणे निमा-इ-चान्देर अधिबास
अर्थ

यह कैसा आनन्द प्रकट हुआ है? इस शुभ क्षण में भगवान् निमाईचन्द्र के अधिवास का संस्कार हो रहा है।

गन्ध-माल्य दे-इ अत्म-गणे दिश आलो करे गोरा अङ्गेर किरणे
अर्थ

हर अतिथि को सुगन्धित फूलों की माला दी जाती है। भगवान् गौर के अंगों की कान्ति दिशाओं को प्रकाश से भर देती है।

सभा-मध्ये गोरा द्विज-मणि बिलासये कत न अर्बुद काम जिनि
अर्थ

सभा के बीच ब्राह्मणों के रत्न भगवान् गौर शोभामयी लीला कर रहे हैं। वे कितने करोड़ कामदेवों को परास्त नहीं कर देते!

बारेक ये चाय गोरा पाने ना धरे धैरज से आपना नाहि जाने
अर्थ

भगवान् गौर की ओर एक बार देखते ही कोई भी अपना धैर्य नहीं रख पाता। किसी को यह भी याद नहीं रहता कि वह कौन है।

ये-जन आ-इल अधिबासे गन्ध-चन्दनादि दिया सबे परितोषे
अर्थ

उस अधिवास में जो-जो अतिथि आया, उन सबको चन्दन-लेप, सुगन्ध और दूसरे उपहार दिए गए। सब सन्तुष्ट हैं।

बिधिमते करि अधिबास बल्लभ आचार्य गेला आपना आबास
अर्थ

विधिपूर्वक अधिवास सम्पन्न करके वल्लभ आचार्य अपने घर लौट गए।

कहिते सुखेर अन्त ना-इ आ-इ हो शु-इहो लञा शुभ कर्म करे आ-इ
अर्थ

उस उत्सव का आनन्द कहाँ जाकर समाप्त होता है, यह कहने की शक्ति किसी में नहीं है। माता शची महिमामयी हैं। उनके सब कर्म शुभ हैं।

नरि-गने दे-इ यजकर भाट-गणे करये मङ्गल कायबार
अर्थ

स्त्रियाँ उपहार देती हैं। भाट कवि मंगलमय कविताएँ सुनाते हैं।

नृत्य गीत बाद्य नाना भाति उपमा दिबार ना-इ काहार शकति
अर्थ

नृत्य, गीत और वाद्य के बहुत से सुन्दर प्रकार हैं। इन कार्यों की किसी और वस्तु से तुलना करने के लिए ठीक-ठीक उपमा और रूपक कहने की शक्ति किसमें है? किसी में नहीं है।

केबा ना बलये भाल भाल जग-भरि जय जय शबद रसाल
अर्थ

ऐसा कौन है जो “उत्तम! महिमामय!” नहीं कहता? सारा संसार “जय! जय!” की मधुर ध्वनि से भर गया है।

मानुषे मिशाये देब=गणे देखि अधिबास-रङ्ग नरहरि भणे
अर्थ

मनुष्यों के बीच घुल-मिलकर देवता भगवान् गौर के अधिवास का उत्सव देख रहे हैं। ऐसा यह नरहरि कहता है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
12