Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री कृष्ण कीर्तने जदि मानस तोहार

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श्री-कृष्ण-कीर्तने जदि मानस तोहार परम जतने तँहि लभ अधिकार
अर्थ

यदि तुम्हारा मन श्री कृष्ण-कीर्तन में लगा है, तो बड़े यत्न से उसमें अधिकार प्राप्त करो।

तृणाधिक हीन दीन अकिञ्चन छार आपने मानोबि सदा छार्डि' अहङ्कार
अर्थ

तब तुम अहंकार को त्यागकर स्वयं को घास के तिनके से भी अधिक तुच्छ, दीन और राख के समान निकम्मा समझोगे।

बृख-सम खमा-गुण कोर्बि साधन प्रतिहिंसा त्यजि' अन्ये कोरोबि पालन
अर्थ

तुम वृक्ष के समान सहनशीलता का अभ्यास करोगे, और हिंसा को त्यागकर दूसरों की रक्षा करोगे।

जीबन-निर्बाहे आने उद्बेग ना दिबे पर-उपकारे निज-सुख पाशरिबे
अर्थ

अपने जीवन में तुम दूसरों को कभी कष्ट नहीं दोगे। अपने सुख को भूलकर तुम दूसरों की भलाई करोगे।

होइले-ओ सर्ब-गुणे गुणी महाशोय प्रथिष्ठाशा छार्डि' कोरो अमानी हृदोय
अर्थ

तब तुम सभी गुणों से युक्त महात्मा बन जाओगे, और यश की कामना को त्यागकर विनम्र हृदय वाले हो जाओगे।

कृष्ण-अधिष्ठान सर्ब-जीबे जानि' सदा कोरोबि सम्मान सबे आदरे सर्बदा
अर्थ

यह जानते हुए कि कृष्ण प्रत्येक जीव के हृदय में निवास करते हैं, तुम सदा सबका आदर सत्कार करोगे।

दैन्य दोया अन्ये मान प्रतिष्ठा-बर्जन चारि-गुणे गुणी हो-इ' कोरोहो कीर्तन
अर्थ

दीनता, दया, दूसरों का सम्मान और अपनी प्रतिष्ठा की इच्छा का त्याग, इन चार गुणों से युक्त होकर कीर्तन करो।

भकतिबिनोद कदि' बोले प्रभु-पाय हेनो अधिकार कबे दिबे हे अमाय
अर्थ

प्रभु के चरणों में जाकर भक्तिविनोद कहते हैं, "हे प्रभु, आप मुझे ऐसा अधिकार कब देंगे?"

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।