Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री रूप बदने श्री सचि कुमार

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टेक्स्ट
श्री-रूप-बदने श्री-सचि-कुमार स्व-नाम-महिमा कोरलो प्रचार
अर्थ

श्रील रूप गोस्वामी के मुख से चैतन्य महाप्रभु ने अपने ही नाम की महिमा का प्रचार किया।

जो नाम सो हरि कछु नाइ भेद सो नाम सत्य-मिति गायति बेद
अर्थ

जो नाम है, वह हरि से कुछ भी भिन्न नहीं है। इस सत्य को वेद गाते हैं।

सबु उपनिसड रत्न-माला-द्युति झकमकि' चरण-समीपे मङ्गल-आरति कोरो-इ अनुखण द्वि-गुणित-पञ्च-प्रदीपे
अर्थ

दस दीपकों से, क्षण-क्षण उपनिषदें, जो रत्नों की मालाओं के समान चमकती हैं, नाम के चरणों में मंगल-आरती करती हैं।

चौद्द भूबन माह देब-नर-दानब भाग जाकोर बलबान नाम-रस-पीयूष पिबो-इ अनुखण छोडत करम-गेयान
अर्थ

कर्म और ज्ञान से मुख मोड़कर, चौदह लोकों में सबसे भाग्यशाली देवता, मनुष्य और दानव क्षण-क्षण नाम के रस-अमृत का पान करते हैं।

नित्य मुक्त पुनः नाम-उपासना सतत कोरो-इ साम-गाने गोलोके बैठत गा-ओवे निरन्तर नाम-बिरह नाहि जाने
अर्थ

साम वेद के गीत गाते हुए, नित्य-मुक्त आत्माएँ गोलोक में सदा नाम की उपासना करती हैं। वे नाम से वियोग कभी नहीं जानतीं।

सबु-रस-आकर हरि इति द्व्य्-अखर सबु-भाबे करोलुँ आश्रोय नाम चरणे पर्डि भक्तिबिनोद कोहे तुया पदे मागोहुँ निलोय
अर्थ

मैं पूर्ण प्रेम से इन दो अक्षरों "हरि" की शरण लेता हूँ, जो समस्त रस का स्रोत हैं। नाम के चरणों में गिरकर भक्तिविनोद कहते हैं, "मैं आपके चरणों में निवास की भीख माँगता हूँ।"