Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

शुन शुन ए सखि निवेदन तोय

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

शुन शुन ए सखि निबेदन तोय मरमक बेदन जानसि मोय
अर्थ

सुनो, सुनो, हे सखी, मेरी यह विनती, तुम मेरे हृदय की पीड़ा को जानती हो।

बैठहे नाह चतुर-गण माझि ऐछे कहबि यैछे ना होय लाज
अर्थ

मेरे नाथ चतुर सखाओं के बीच बैठे हैं; ऐसे बोलना कि कोई लज्जा न हो।

सखी-गण माझे चतुरी तोहे जानि आदर राखि मिलायबि आनि
अर्थ

सखियों में तुम्हें ही सबसे चतुर जानती हूँ, मेरी लाज बचाते हुए हमारा मिलन करवा दो।

अब बिरचह तुहुँ सो परबन्ध कानुक यैछे होय निरबन्ध
अर्थ

अब ऐसी कोई युक्ति रचो जिससे कान्हा से मिलन में कोई बाधा न आए।

जीबन रहिते नाह यदि पाब गोबिन्द-दास तब तुय यश गाब
अर्थ

गोविन्द दास कहते हैं, यदि जीते-जी मैं अपने नाथ को पा लूँ, तो मैं तुम्हारा यश गाऊँगी।