Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

तं रहसि गतं किशलय शयन शयनं

तं रहसि गतं किशलय-शयन-शयनं हरिर् अलोकत निज-मुरली-कल-कलय चित्रित-भनम्
अर्थ

कृष्ण की बाँसुरी के मधुर संगीत ने राधा को विस्मय से भर दिया और वे बेहोश हो गईं। उस एकान्त स्थान में खिलती हुई कोमल टहनियों की शय्या पर अचेत पड़ी राधा को कृष्ण ने निहारा।

य निज-वदनमृत-रुचिन तन्-मुख्ह-रत्नम् अजस्रम् बहल-मसि-स्रवद् इह यद् भतम् प्रतिपद-सम्पतद्-अस्रम्
अर्थ

राधा के मुख की अमृतमयी चाँदनी से कृष्ण के मुख का चन्द्रकान्त मणि पिघल गया। आँसुओं ने कृष्ण की आँखों को सजाने वाली काली मसी (काजल) को बहा दिया।

यस्य हृदयं स्वन्तरम् अनु तत्-कयं भज-दव-कलितम् बहिर् अपि तं प्रतिबिम्ब-व्यजद् व्यनञ्जत्मनि वलितम्
अर्थ

राधा अपने हृदय की वन की आग में कृष्ण को खोजती रहीं। यद्यपि कृष्ण उनके सामने प्रकट थे, फिर भी उन्होंने यही समझा कि कृष्ण उनके हृदय में हैं, और किसी युक्ति से वे अब बाहर प्रतिबिम्ब के रूप में दिख रहे हैं।

यस्यं दोष-त्रयम् इति मतिभिः प्रत्तं कुङ्कुम-रगम् मेने मुर-रिपुर् अथ सक्षद् इव यतं कृद्-गत-रगम्
अर्थ

राधा ने समझा कि उनके वक्ष पर लगा लाल कुंकुम का चूर्ण किसी जलाने वाले रोग का लक्षण है। कृष्ण ने समझा कि यह प्रेम है, जो राधा के हृदय से उमड़कर बाहर आ गया है।

यं पश्यन् स तु सत्विक-भवं दधद् अपि चित्त-विकरम् भेजे यत्र प्रतिकृति-कृद् अपि प्रतिकृतिर् इति च विचरम्
अर्थ

राधा को देखते हुए कृष्ण का हृदय प्रेम से भर गया और उनके शरीर में आनन्द-भाव के लक्षण प्रकट हो गए। वे निश्चल मूर्ति की तरह खड़े रह गए, और उन्होंने देखा कि राधा भी मूर्ति जैसी लग रही हैं।

समय प्रतिकृतित-भ्रमम् अगद् एवं भवन-शली भव-परीक्षन-कृन् मे कृतको 'प्य् एतम् इन्द्रकजली
अर्थ

राधा के प्रेम की परीक्षा लेने की इच्छा से कृष्ण ने जादू का ऐसा भ्रम रचा कि वे स्वयं मूर्ति जैसे दिखाई देने लगे।

तद् अपि च यत्र स्पृहयन्न् अथ यम् एनं मेने रधम् वृन्द-यच्ञं प्रत्यचष्ट च दधद् अपि दुःखद् बधम्
अर्थ

कृष्ण राधा के चिन्तन में लीन रहे। वे राधा को पाने के लिए तरसते रहे। वृन्दा के कहने पर बड़ी कठिनाई से उन्होंने वह जादू का भ्रम छोड़ा।

स पुनर् यस्य हेतोः शोचन् व्यजित-वृन्द-वननम् विदधे यद्-हृदि निज-पद-पल्लवम् अभितो जीवन-जननम्
अर्थ

कृष्ण राधा के लिए शोक करने लगे। चतुर वृन्दा की सलाह मानकर कृष्ण ने अपने जीवन लौटा देने वाले चरण-कमल राधा के हृदय पर रख दिए।

इस भजन के बारे में

पद
8