Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

तोमारे भुलिया अविद्या पीडाय

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टेक्स्ट
हरि हे! तोमारे भुलिया, अविद्या-पीडाय, पीडित रसना मोर कृष्ण-नाम-सुधा, भालो नाहि लागे, विषय-सुखते भोर
अर्थ

हे हरि! तुझे भूलकर मेरी जिह्वा अविद्या रूपी पीलिया से पीड़ित हो गई है। सांसारिक सुखों में डूबी इस जिह्वा को कृष्ण-नाम का अमृत अच्छा नहीं लगता।

प्रति-दिन जदि, आदर कोरिया, से नाम कीर्तन कोरि सितपल जेनो, नाशि’ रोग-मूल, क्रमे स्वादु होय, हरि!
अर्थ

यदि मैं प्रतिदिन श्रद्धा से इस नाम का कीर्तन करूँ, तो जैसे मिश्री पीलिया की जड़ को नष्ट कर देती है, वैसे ही धीरे-धीरे इसका स्वाद मुझे मिलने लगेगा, हे हरि!

दुर्दैव आमार, से नामे आदर, ना होइलो, दोयामोय! दश अपराध, आमार दुर्दैव, केमोने होइबे क्षोय
अर्थ

मेरा दुर्भाग्य है कि मुझे उस नाम में कभी श्रद्धा नहीं हुई। हे दयामय! मेरे दुर्भाग्य रूपी ये दस अपराध कैसे नष्ट होंगे?

अनुदिन जेनो, तव नाम गाइ, क्रमेते कृपाय तव अपराध जा’बे, नामे रुचि ह’बे, आस्वादिबो नामासव
अर्थ

जैसे-जैसे मैं निरंतर तेरा नाम गाऊँगा, तेरी कृपा से मेरे अपराध धीरे-धीरे दूर होते जाएँगे। मुझे तेरे नाम में रुचि प्राप्त होगी, और मैं तेरे नाम के अमृत का आस्वादन करूँगा।