Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

राधे! रहस्य गोपन लागि

राधे! रहस्य गोपन लागि, वृन्दा-देवी अनुरागी नियोजिवे तबे निज जने व्रजे पशु-पक्षी सव, उच्चारिबे निज रव निद्रा-भङ्गे करिबे यतन
अर्थ

हे राधे! इस रहस्य को छिपाए रखने के लिए अनुरागिनी वृन्दा देवी अपने लोगों को लगाएँगी। व्रज के सारे पशु-पक्षी अपनी-अपनी बोली बोलकर बड़े यत्न से उनकी नींद तोड़ने लगेंगे।

शुक-शारी करि गन, कोकिल धरिबे तान झस्कारिबे भ्रमरादि सबे निद्रा-भङ्ग ना हैले, कक्खटीर कोलाहले जागिबे हे राधे कृष्ण तबे
अर्थ

शुक और शारी गाने लगेंगे, कोयल तान छेड़ेगी, और भौंरे गुंजार करेंगे। यदि फिर भी नींद न टूटे, तो कक्खटी (राधा की पालतू बन्दरिया) के कोलाहल से राधा-कृष्ण जागेंगे।

दुँह रसालस रूप, हेरि पाब बड सुख कबे हाम मातब सेवाय दिब सुरासित जल, श्री-कर्पूर सु-ताम्बूल नूपुर पराब सेँह पाय
अर्थ

दोनों के रस से अलसाए रूप को देखकर मुझे बड़ा सुख मिलेगा। कब मैं उनकी सेवा में मग्न होऊँगी: सुगन्धित जल और कपूर वाला सुन्दर पान दूँगी, और उनके चरणों में नूपुर पहनाऊँगी?

शुनिब श्रवण भरि, रसोद्गार सु-माधुरी दुँहार आरति दरशने उखलिबे सुख सिन्धु, ओ राधे पराण-बन्धु दुँहु मुख हेरि क्षणे क्षणे
अर्थ

मैं कान भरकर रस से भरी मधुर बातें सुनूँगी। दोनों की आरती के दर्शन से सुख का सागर उमड़ पड़ेगा। "हे राधे, मेरे प्राणों की सखी! मैं क्षण-क्षण आप दोनों के मुख निहारती हूँ।"

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
सेवा लालसा
पद
4