विरुदावली 3
हे प्रभु, आपने राजा युधिष्ठिर के लिए राजसूय यज्ञ का आयोजन करवाया। हे प्रभु, आपके रथ की गड़गड़ाहट दिशाओं को थामने वाले हाथियों को भी सुनाई दी। हे प्रभु, आप अपने नगर लौट आए...
...हे प्रभु, आपने आकाश में उड़ता हुआ महान सौभ विमान देखा। हे प्रभु, आपने बाणों से उस विमान को नष्ट कर दिया। हे प्रभु, आपने अस्त्र के सामने अस्त्र चलाकर शाल्व से युद्ध किया...
...हे प्रभु, आपने सौभ विमान को तोड़ डाला। हे प्रभु, आपने शाल्व की मायावी चालों से मोहित होने का दिखावा किया। हे प्रभु, आपके इस दिखावटी मोह ने साधु मुनियों को भी मोहित कर दिया...
...हे प्रभु, आपने शाल्व के अस्त्र तोड़ डाले। हे प्रभु, आपने अनेक प्रहारों से शाल्व को हराया। हे प्रभु, आपने गदा से सौभ विमान के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। हे प्रभु, आपने शाल्व का अभिमान दूर कर दिया...
...हे प्रभु, आपने एक बाण से शाल्व का दायाँ हाथ काट दिया। हे प्रभु, आपने चक्र से शाल्व की गर्दन काट दी। हे प्रभु, आपने इस तरह अनेक अद्भुत कार्य किए। हे वीर, हे व्रज के प्रिय, आप अत्यन्त महिमामय और तेजस्वी हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- जीव गोस्वामी · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- गोपाल-चम्पू
- पद
- 5