Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गोद्रुम धामे भजन अनुकूले

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टेक्स्ट
गोद्रुम-धामे भजन-अनुकूले माथुर-श्री-नन्दीश्वर-समतुले
अर्थ

भजन के अनुकूल गोद्रुम धाम, मथुरा के श्री नन्दीश्वर के समान है।

तहि माह सुरभि-कुञ्ज-कुटीरे बैठोबुँ हाम सुर-तटिनी-तीरे
अर्थ

वहीं, सुरभि नामक कुंज में, मैं गंगा के तट पर एक कुटिया में निवास करूँगा।

गौर-भकत-प्रिय-वेश दधाना तिलक-तुलसी-माला-शोभमाना
अर्थ

गौरांग के भक्तों को प्रिय वेश धारण करके, मैं तिलक और तुलसी की माला से सुशोभित रहूँगा।

चम्पक, बकुल, कदम्ब, तमाल् रोपतो निरमिबो कुञ्ज विशाल्
अर्थ

चम्पा, बकुल, कदंब और तमाल के वृक्ष लगाकर मैं एक विशाल कुंज बनाऊँगा।

माधवी मालती उठाबुँ ताहे छाया-मन्डप कोरोबुँ तँहि माहे
अर्थ

उन वृक्षों पर चढ़ने के लिए मैं माधवी और मालती की बेलें लगाऊँगा, और कुंज के बीचोंबीच एक छायादार मंडप बनाऊँगा।

रोपोबुँ तत्र कुसुम-वन-राजि
अर्थ

वहाँ मैं विभिन्न वन-फूलों की पंक्तियाँ लगाऊँगा, और जूही, जाती और मल्ली के फूलों को सुंदर ढंग से सजाऊँगा।

मञ्चे बसाओबुँ तुलसी-महाराणी कीर्तन-सज्ज तँहि राखबो आनि’
अर्थ

एक वेदी पर मैं तुलसी महारानी को स्थापित करूँगा, और वहाँ कीर्तन के लिए वाद्य-यंत्र भी रखूँगा।

वैष्णव-जन-सह गाओबुँ नाम् जय गोद्रुम जय गौर कि धाम्
अर्थ

वैष्णवों की संगति में मैं नाम-कीर्तन करूँगा। गोद्रुमद्वीप की जय हो! श्री गौरांग के धाम की जय हो!

भकतिविनोद भक्ति-अनुकूल् जय कुञ्ज, मुञ्ज, सुर-नदी-कूल्
अर्थ

भक्तिविनोद भक्ति के अनुकूल सब कुछ की जयकार करता है। कुंजों की जय हो, तृणों की जय हो, गंगा के तट की जय हो!