सर्वस्व तोमार्, चरणे
मैंने अपना सब कुछ आपके चरणों में समर्पित कर दिया है और आपके घर में शरण ली है। आप ही मेरे स्वामी हैं, मुझे अपना कुत्ता समझिए।
आप मुझे पास बांधकर रखेंगे और मेरा पालन करेंगे, मैं आपके द्वार पर पड़ा रहूँगा। मैं किसी भी विरोधी व्यक्ति को भीतर नहीं आने दूँगा, उन्हें खाई के उस पार ही रोक दूँगा।
आपके निजजन जो प्रसाद पाकर उच्छिष्ट छोड़ देंगे, वही मेरा भोजन होगा, और मैं उसे प्रतिदिन परम आनंद से ग्रहण करूँगा।
बैठे या लेटे, मैं सदा आपके चरणों का ही चिंतन करूँगा। जब भी आप बुलाएँगे, मैं नाचते-नाचते आपके पास चला आऊँगा।
मैं अपने पालन-पोषण की कभी चिंता नहीं करूँगा, मैं सदा आपके प्रेम-भाव की शरण में रहूँगा। भक्तिविनोद आपको ही अपना पालनकर्ता मानकर स्वीकार करते हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- शरणागति
- भाव
- पद
- 5
- रिकॉर्डिंग
- 5 इस गायक के और भजन इस रचयिता के और भजन
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर। सभी भक्त गायकों की जय।