तुमि तो’ मारिबे जारे
आप जिसे मारना चाहें, उसे कौन बचा सकता है? तीनों लोक आपकी इच्छा के अधीन हैं। ब्रह्मा आदि असंख्य देवता आपके ही दास हैं और आपकी आज्ञा का पालन करते हैं।
आपकी इच्छा से ही सभी ग्रह निरंतर शुभ और अशुभ फल देते रहते हैं। रोग, शोक, मृत्यु और भय, ये सब आपकी इच्छा से ही होते हैं। आपकी आज्ञा सदा सर्वोपरि है।
आपके भय से ही वायु चलती है, और चन्द्रमा, सूर्य तथा सारे ग्रह-नक्षत्र अपने-अपने नियत कार्य करते हैं। आप ही परमेश्वर हैं, परब्रह्म और परात्पर हैं, और आप अपने भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।
आप सदा शुद्ध हैं, आपकी सभी कामनाएँ सिद्ध हैं। आप 'भक्तवत्सल' नाम से जाने जाते हैं और भक्तों के नित्य स्वामी हैं। आप जिसकी रक्षा करना चाहें, उसे कौन मार सकता है? आप ही सबके भाग्य के विधाता हैं।
हे नाथ! आपके दास भक्तिविनोद ने आपके चरणों में प्रणाम किया है। हे स्वामी! आप निश्चय ही उसे विपत्ति से बचाएँगे, यही उसका विश्वास है।
इस भजन के बारे में
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- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।