तुमि सर्वेश्वरेश्वर ब्रजेन्द्र कुमार
आप ही सब ईश्वरों के ईश्वर हैं, हे व्रजेंद्र-कुमार! आपकी ही इच्छा से इस विश्व में सृष्टि और संहार होते हैं।
आपकी इच्छा से ही ब्रह्मा सृष्टि करते हैं, और आपकी इच्छा से ही विष्णु पालन करते हैं।
आपकी इच्छा से ही शिव संहार करते हैं, और आपकी इच्छा से ही माया अपनी कारागार की रचना करती है।
आपकी इच्छा से ही जीवों का जन्म और मरण होता है, और आपकी इच्छा से ही उन्हें उन्नति-अवनति तथा सुख-दुःख प्राप्त होते हैं।
माया से बंधे हुए जीव व्यर्थ ही चारों ओर भटकते रहते हैं, आपकी इच्छा के बिना वे कुछ भी करने में असमर्थ हैं।
आप ही मेरे रक्षक और पालनकर्ता हैं। आपके चरणों के अतिरिक्त मुझे और कोई आशा नहीं है।
अपने बल और प्रयास पर भरोसा छोड़कर, मैं केवल आपकी इच्छा पर निर्भर हूँ।
भक्तिविनोद अत्यंत दीन और अकिंचन हैं। उनका जीवन और मरण आपकी ही इच्छा से है।
इस भजन के बारे में
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- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।