Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मणि मलकृत गो गण गणनपुरणम् अनु सनन्दम्

मणि-मलकृत-गो-गण-गणनपुरणम् अनु सनन्दम् प्रणयितरंसग-भुजम् उद्गन-हृत-हरिणीकम् अमन्दम्
अर्थ

कृष्ण अपनी बाँह एक मित्र के कन्धे पर रखकर प्रसन्नता से अपनी मणि-माला रूपी गिनतारे पर सुरभि गायों को गिन रहे हैं। उनके गायन से हिरनियाँ मोहित हो जाती हैं।

कृष्णं कलयत मोहन-मन्त्रगम् एणीम् एणी-नयनम् न यदि तद कथम् उभय-व्यक्तिं वीक्षे तद्-अपृथग्-अयनम्
अर्थ

देखो! कृष्ण अब जादुई मन्त्र पढ़ रहे हैं। यदि वे नहीं पढ़ रहे, तो जहाँ वे खड़े हैं, उसी स्थान पर मुझे एक हिरनी और एक मृगनयनी गोपी, दोनों एक साथ क्यों दिखाई दे रही हैं?

इस भजन के बारे में

पद
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