रमो रमनुज इति युगलम्
जब उनके सखा गाते हैं, तब बलराम और उनके छोटे भाई कृष्ण कुशलता से नृत्य करते हैं।
उन दोनों के सुन्दर मस्तक आम के सुन्दर फूलों से सजे हैं। उनके नवयौवन के वन में उनकी प्रणय-अभिलाषाएँ बीज से फूटते हुए नए अंकुर के समान हैं।
उन दोनों के केश मोरपंखों और अनेक सुन्दर मणियों से सजे हैं। वे ऐसे छोटे-छोटे काले बादलों के समान दिखते हैं, जिनमें तारे और इन्द्रधनुष हैं।
उन दोनों के घुमावदार कान ऐसे अद्भुत सुन्दर हैं, जैसे नए खिले कमल-पुष्पों की कर्णिकाएँ। फूलों जैसे इन कानों को देखकर भौंरों के मन में उनका मधु पीने का लोभ भर जाता है। वे विस्मय में पड़कर कहते हैं, “यह कौन-सी लता है, जिसने ये फूल खिलाए हैं?”
उन दोनों के लालिमा लिए हाथ सुन्दर हैं। वे सुन्दर ढंग से हिलते हुए ऐसे कमल हैं, जो भौंरों पर मकरन्द की बूँदें बरसाते हैं।
उन दोनों की पुष्प-मालाओं की मधुर सुगन्ध से खिंचकर गुंजार करते हुए भौंरे बड़े उल्लास के साथ स्तुतियों का कोलाहल करते हैं।
उन दोनों के महिमामय रूप गोरे और श्याम हैं, और उनके सुन्दर वस्त्र भी हल्के और गहरे रंग के हैं। यदि वे दोनों सुरभि गायों के झुंड के पीछे-पीछे गोकुल ग्राम में आ जाएँ, तो हमारे सारे दुःख समाप्त हो जाएँगे।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- जीव गोस्वामी · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- गोपाल-चम्पू
- पद
- 7