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“हरे कृष्ण” के परिणाम

558 भजन · 980 पद भजन के शब्दों में

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2 पद भजन में 3

भक्तिविनोद ठाकुर · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    पखि ना जानि कोन् अपराधे
    मुखे हरे कृष्ण नाम् बोलो ना
  • पद 3भजन
    पखि सकल् नाम् बोल्ते परो
    केनो हरे कृष्ण नाम् बोलो न
    केनो हरे कृष्ण नाम् हरि बोले मनो प्राण् काँदे ना
4 पद भजन में

जीव गोस्वामी · गोपाल-चम्पू

  • पद 1भजन
    रध-रक-शशधर मुरली-कर गोकुल-पति-कुल-पल जय जय कृष्ण हरे
    रध-बध-मोचन मुख-रोचन विदलित-गोकुल-कल जय जय कृष्ण हरे
  • पद 2भजन
    रध-परिकर-पुण्यद नैपुण्यद गोकुल-रुचिषु विशल जय जय कृष्ण हरे
    रध-सुकृत-वशी-कृत मङ्गल-भृत-तिलकित-गोकुल-भल जय जय कृष्ण हरे
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  • पद 3भजन
    रध-निज-गति-धर्मद पुरु-शर्मद हत-गोकुल-रिपु-जल जय जय कृष्ण हरे
    रध-जीवन-जीवन गो-व्रज-धन गोकुल-सरसि-मरल जय जय कृष्ण हरे
  • पद 4भजन
    रध-मोद-रसकर सरसिज-वर गोकुल-मण्डल-नल जय जय कृष्ण हरे
    रध-भुषण भुषण गत-दुषण गोकुल-हृदिल-भु-पल जय जय कृष्ण हरे
1 पद भजन में

गोविन्द दास · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 5भजन
    एहेन गौराङ्ग-गुण न करिनु श्रबण
    हय हय करि ह हुताश
    हरे-कृष्ण महा-मन्त्र मुख भरि ना ल-इलाम
    जीबन्-मृत गोबिन्द-दास
5 पद भजन में 13

श्रीनिवास आचार्य · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    कृष्णोत्कीर्तन-गान-नर्तन-परौ प्रेमामृताम्भो-निधी
    धीराधीर-जन-प्रियौ प्रिय-करौ निर्मत्सरौ पूजितौ
    श्री-चैतन्य-कृपा-भरौ भुवि भुवो भारावहन्तारकौ
    वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
  • पद 2भजन
    नाना-शास्त्र-विचारणैक-निपुणौ सद्-धर्म-संस्थापकौ
    लोकानां हित-कारिणौ त्रि-भुवने मान्यौ शरण्याकरौ
    राधा-कृष्ण-पदारविन्द-भजनानन्देन मत्तालिकौ
    वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
  • पद 5भजन
    कूजत्-कोकिल-हंस-सारस-गणाकीर्णे मयूराकुले
    नाना-रत्न-निबद्ध-मूल-विटप-श्री-युक्त-वृन्दावने
    राधा-कृष्णम् अहर्-निशं प्रभजतौ जीवार्थदौ यौ मुदा
    वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
  • पद 6भजन
    सङ्ख्या-पूर्वक-नाम-गान-नतिभिः कालावसानी-कृतौ
    निद्राहार-विहारकादि-विजितौ चात्यन्त-दीनौ च यौ
    राधा-कृष्ण-गुण-स्मृतेर् मधुरिमानन्देन सम्मोहितौ
    वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
  • पद 7भजन
    राधा-कुण्ड-तटे कलिन्द-तनया-तीरे च वंशीवटे
    प्रेमोन्माद-वशाद् अशेष-दशया ग्रस्तौ प्रमत्तौ सदा
    गायन्तौ च कदा हरेर् गुण-वरं भावाभिभूतौ मुदा
    वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
6 पद भजन में

भक्तिविनोद ठाकुर · शरणागति

  • पद 1भजन
    कृष्ण-नाम धरे कोतो बल्
    विषय-वासनानले, मोर चित्त सदा ज्वले,
    रवि-तप्त मरु-भूमि-सम्
    कर्न-रन्ध्र-पथ दिया, हृदि माझे प्रवेशिया, …
  • पद 4भजन
    कोरि' एतो उपद्रव, चित्ते वर्षे सुधा-द्रव,
    मोरे डारे प्रेमेर सागरे
    किछु ना बुझिते दिलो, मोरे तो’ बातुल कोइलो,
    मोर चित्त-वित्त सब हरे
इस भजन में 4 और मिलान दिखाएँ
  • पद 5भजन
    लोइनु आश्रोय जा’र्, हेनो व्यवहार ता’र्,
    वर्निते ना पारि ए सकल्
    कृष्ण-नाम इच्छा-मोय्, जाहे जाहे सुखी होय्,
    सेइ मोर सुखेर सम्बल्
  • पद 6भजन
    प्रेमेर कलिका नाम्, अद्भुत रसेर धाम्,
    हेनो बल करये प्रकाश्
    ईषत् विकशि’ पुनः, देखाय् निज-रूप-गुन,
    चित्त हरि’ लोय कृष्ण-पाश्
  • पद 7भजन
    पूर्न विकशित होइया, ब्रजे मोरे जाय लोइया,
    देखाय् मोरे स्वरूप-विलास्
    मोरे सिद्ध-देह दिया, कृष्ण-पाशे राखे गिया,
    ए देहेर कोरे सर्व-नाश्
  • पद 8भजन
    कृष्ण-नाम-चिन्तामणि, अखिल रसेर खनि,
    नित्य-मुक्त शुद्ध-रस-मोय्
    नामेर बालाइ जत, सब लो’ये होइ हत,
    तबे मोर सुखेर उदोय्
8 पद भजन में 6

जीव गोस्वामी · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    कृष्ण-प्रेम-मयी राधा
    राधा प्रेम-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 2भजन
    कृष्णस्य द्रविनं राधा
    राधाया द्रविनं हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
इस भजन में 6 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    कृष्ण-प्राण-मयी राधा
    राधा-प्राण-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 4भजन
    कृष्ण-द्रव-मयी राधा
    राधा-द्रव-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 5भजन
    कृष्ण-गेहे स्थिता राधा
    राधा-गेहे स्थितो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 6भजन
    कृष्ण-चित्त-स्थिता राधा
    राधा-चित्त-स्थितो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 7भजन
    नीलाम्बर-धरा राधा
    पीताम्बर-धरो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 8भजन
    वृन्दावनेश्वरी राधा
    कृष्णो वृन्दावनेश्वरः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
9 पद भजन में

भक्तिविनोद ठाकुर

  • पद 1भजन
    श्री-कृष्ण-तत्त्व-निर्देशे कृपा यस्य प्रयोजनम्
    वन्दे तं ज्ञानदं कृष्ण-चैतन्यं रस-विग्रहम्
  • पद 4भजन
    आसीद् एकः परः कृष्णो नित्य-लीला-परायणः
    चिच्-छक्त्याविष्कृते धाम्नि नित्य-सिद्ध-गणाश्रिते
इस भजन में 7 और मिलान दिखाएँ
  • पद 8भजन
    ऐश्वर्य-कर्षिता एके नारायण-परायणाः
    माधुर्य-मोहिताश् चान्ये कृष्ण-दासाः सुनिर्मलाः
  • पद 13भजन
    यम् ऐश्वर्य-परा जीवा नारायणं वदन्ति हि
    माधुर्य-रस-सम्पन्नाः कृष्णम् एव भजन्ति तम्
  • पद 14भजन
    रस-भेद-वशाद् एको द्विधा भाति स्वरूपतः
    अद्वयः स परः कृष्णो विलासानन्द-चन्द्रमाः
  • पद 19भजन
    शान्त-भावस् तथा दास्यं सख्यं वात्सल्यम् एव च
    कान्त-भाव इति ज्ञेयाः सम्बन्धाः कृष्ण-जीवयोः
  • पद 25भजन
    शान्ता दासाः सखाश् चैव पितरो योषितस् तथा
    सर्वे ते सेवका ज्ञेयाः सेव्यः कृष्णः प्रियः सताम्
  • पद 31भजन
    जीवानां सिद्ध-सत्त्वानां नित्य-सिद्धिमताम् अपि
    एतन् नित्य-सुखं शश्वत् कृष्ण-दास्ये नियोजितम्
  • पद 34भजन
    यस्येह वर्तते प्रीतिः कृष्णे व्रज-विलासिनि
    तस्यैवात्म-समाधौ तु वैकुण्ठो लक्ष्यते स्वतः
8 पद भजन में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    भाद्र-कृष्ण-अष्टमीते देबकी-उदरे
    जन्मिलेन कृष्णचन्द्र श्री-मथुरा-पुरे
  • पद 3भजन
    वसुदेब थु-इल निया नन्द-घोषेर घरे
    नन्देर अलये कृष्ण दिन दिन बाडे
इस भजन में 6 और मिलान दिखाएँ
  • पद 9भजन
    अनन्त राखिल नाम अन्त ना पा-इया
    कृष्ण-नाम राखे गर्ग ध्यानेते जानिया
  • पद 29भजन
    अनन्त कृष्णेर नाम अनन्त महिमा
    नारदादि ब्यासदेब दिते नारे सीमा
  • पद 30भजन
    . नाम भज नाम चिन्त नाम कर सार
    अनन्त कृष्णेर नाम महिमा अपार
  • पद 31भजन
    शङ्ख-भरि सुबर्ण गो-कोटि करे दान
    तथापि ना हय कृष्ण-नामेर समान
  • पद 32भजन
    ये-इ नाम से-इ कृष्ण भज निष्ठा करि
    नामेर सहित आछेन आपनि श्री-हरि
  • पद 36भजन
    अष्टोत्तर-शत नाम ये करे पठन
    अनायासे पाय राधा-कृष्णेर चरण
7 पद भजन में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतमाला

  • पद 1भजन
    धन जन देह गेह कृष्णे समर्पण
    कोरियाछो शुद्ध-चित्ते कोरोहो स्मरण
  • पद 2भजन
    तबे केनो मम सुत बोलि' कोरो दुःख
    कृष्ण निलो निज-जन ताहे तार सुख
इस भजन में 5 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    कृष्ण-इच्छा-मते सब घटय घटना
    ताहे सुख-दुःख-ज्ञान अबिद्या-कल्पना
  • पद 4भजन
    जाहा इच्छा कोरे कृष्ण ताइ जानो भाल
    त्यजिया आपन इच्छा घुचाओ जञ्जाल
  • पद 5भजन
    देय कृष्ण नेय कृष्ण पाले कृष्ण सबे
    राखे कृष्ण मारे कृष्ण इच्छा कोरे जबे
  • पद 6भजन
    कृष्ण-इच्छा बिपरीत जे कोरे बासना
    तार इच्छा नाहि फले से पाय जातना
  • पद 7भजन
    त्यजिया सकल शोक शुनो कृष्ण-नाम
    परम आनन्द पबे पूर्ण हबे काम
5 पद भजन में 8

कृष्णदास कविराज गोस्वामी · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 2भजन
    कौरविन्द-कान्ति-निन्दि-चित्र-पट्ट-शाटिका
    कृष्ण-मत्त-भृङ्ग-केलि-फुल्ल-पुष्प-वाटिका
    कृष्ण-नित्य-सङ्गमार्थ-पद्म-बन्धु-राधिका
    मह्यम् आत्म-पाद-पद्म-दास्य-दास्तु राधिका
  • पद 6भजन
    नित्य-नव्य-रूप-केलि-कृष्ण-भाव-सम्पदा
    कृष्ण-राग-बन्ध-गोप-यौवतेषु कम्पदा
    कृष्ण-रूप-वेश-केलि-लग्न-सत्-समाधिका
    मह्यम् आत्म-पाद-पद्म-दास्य-दास्तु राधिका
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
  • पद 7भजन
    स्वेद-कम्प-कण्टकाश्रु-गद्गदादि-सञ्चिता
    मर्ष-हर्ष-वामतादि-भाव-भुषणाञ्चिता
    कृष्ण-नेत्र-तोषि-रत्न-मण्डनालि-दाधिका
    मह्यम् आत्म-पाद-पद्म-दास्य-दास्तु राधिका
  • पद 8भजन
    या क्षणार्ध-कृष्ण-विप्रयोग-सन्ततोदिता
    नेक-दैन्य-चापलादि-भाव-वृन्द-मोदिता
    यत्न-लब्ध-कृष्ण-सङ्ग-निर्गताखिलाधिका
    मह्यम् आत्म-पाद-पद्म-दास्य-दास्तु राधिका
  • पद 9भजन
    अष्टकेन यस् त्व् अनेन नौति कृष्ण-वल्लभां
    दर्शने 'पि शैलजादि-योषिदालि-दुर्लभाम्
    कृष्ण-सङ्ग-नन्दितात्म-दास्य-सीधु-भाजनं
    तं करोति नन्दितालि-सञ्चयाशु सा जनम्
6 पद भजन में

परमानन्द दास · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय कृष्ण चैतन्य नित्यानन्द चन्द्र
    अद्वैत आचार्य जय गौर-भक्त-वृन्द
  • पद 2भजन
    राधे कृष्ण गोविन्द यमुना बृन्दाबन
    श्री-चैतन्य नित्यानन्द रूप सनातन
इस भजन में 4 और मिलान दिखाएँ
  • पद 4भजन
    राधे कृष्ण रट मन राधे कृष्ण रट
    बृन्दाबन यमुना पुलिन बंशी-बाट
  • पद 5भजन
    राधे कृष्ण रट मन राधे कृष्ण रट
    व्रज-ब्बूमे बास कर यमुना निकट
  • पद 6भजन
    राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण रट रे
    शचीर नन्दन गोरा कीर्तने लम्पट रे
  • पद 7भजन
    राधे कृष्ण राधे कृष्ण राधे गोबिन्द
    श्री-राधा-रमण बन्दे ए परमानन्द
6 पद भजन में

गुणराज खान · श्री कृष्ण विजय

  • पद 3भजन
    किशोर बयस कृष्ण जौबनेर छटा
    श्यामसुन्दर कृष्ण जेन जलधर-पाटा
  • पद 9भजन
    चारि-द्वारे चारि-द्वारी से चारि गोयाल्
    कृष्णेर समान बेश देखिते रसाल्
इस भजन में 4 और मिलान दिखाएँ
  • पद 13भजन
    नाना अलङ्कार शोभे गले बन-माला
    कृष्णेर समान बेश जाने नाना कला
  • पद 15भजन
    माथाय मायूर-पुच्छा गोञ्जा मनोहर्
    सकल गोयाला सेइ कृष्णेर सोदर्
  • पद 17भजन
    कृष्णेर आनन्दे आनन्द सब गोयाल्
    सु-स्वरेते गीत गाय धरिया से ताल्
  • पद 18भजन
    कृष्णेर सेबिया सब कृष्ण-गत-चित्त
    मन्दिरे बेडिया सब गाय नाना-गीत
5 पद भजन में

भक्तिविनोद ठाकुर · कल्याण-कल्पतरु

  • पद 1भजन
    शुनो हे रसिक-जन कृष्ण-गुण अगणन
    अनन्त कहिते नाहि पारे
    कृष्ण जगतेर गुरु कृष्ण बञ्छा-कल्प-तरु
    नाबिक से भब-पाराबारे
  • पद 2भजन
    हृदोय पीडित जा'र कृष्ण चिकित्सक ता'र
    भब-रोग नाशिते चतुर
    कृष्ण-बहिर्मुख-जने प्रेमामृत-बितरणे
    क्रमे लोय निज अन्तःपुर
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    कर्म-बन्ध ज्ञान-बन्ध आबेशे मानब अन्ध
    ता'र कृष्ण कोरुणा-सागर
    पद-पद्म-मधु दिया अन्ध-भाब घुचाइया
    चरणे कोरेन अनुचार
  • पद 4भजन
    बिधि-मार्ग-रत-जने स्वाधीनत-रत्न-दने
    राग-मार्गे कोरान प्रबेश
    राग-बश-वर्ती हो'ये पारकीय-भाबाश्रोये
    लभे जीब कृष्ण-प्रेमाबेश
  • पद 5भजन
    प्रेमामृत-बारि-धारा सदा पान-रत ताँर
    कृष्ण ताँहादेर बन्धु पति
    सेइ सब ब्रज-जन सु-कल्याण-निकेतन
    दीन-हीन-बिनोदेर गति
1 पद भजन में

स्तवामृत-लहरी

  • पद 8भजन
    माथुरं विकुण्ठतो ‘पि जन्म-धाम दुर्लभं
    वासकाननं ततो ऽपि पाणिना धृतो गिरिः
    श्री-हरेस् ततो ऽपि यत् परं सरो ऽति-पावनं
    तत्र कृष्ण-कुण्ड एव संस्थितिः स्तुतास्तु नः