- पद 1भजनहरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
“हरे कृष्ण” के परिणाम
558 भजन · 980 पद भजन के शब्दों में
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1 पद भजन में
5
2 पद भजन में
3
4 पद भजन में
1 पद भजन में
- पद 1भजनकृष्ण गोबिन्द हरे
गोपी-बल्लभ शौरे
1 पद भजन में
- पद 1भजन(हरे) हरये नमः कृष्ण जादबाय नमः
जादबाय माधबाय केशबाय नमः
गोपाल गोबिन्द राम श्री-मधुसूदन
राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्)
1 पद भजन में
- पद 5भजनएहेन गौराङ्ग-गुण न करिनु श्रबण
हय हय करि ह हुताश
हरे-कृष्ण महा-मन्त्र मुख भरि ना ल-इलाम
जीबन्-मृत गोबिन्द-दास
1 पद भजन में
- पद 8भजनहरिर् इति हरिर् इति जपति सकर्णम् (हरे कृष्ण हरे कृष्ण)
विरह-विहित-मरणेव निकामम्
1 पद भजन में
- पद 4भजनहरे कृष्ण हरे राम के शुनाबे आर
हरिदास छेपे गेल प्राण बाँचा भार
5 पद भजन में
13
- पद 1भजनकृष्णोत्कीर्तन-गान-नर्तन-परौ प्रेमामृताम्भो-निधी
धीराधीर-जन-प्रियौ प्रिय-करौ निर्मत्सरौ पूजितौ
श्री-चैतन्य-कृपा-भरौ भुवि भुवो भारावहन्तारकौ
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ - पद 2भजननाना-शास्त्र-विचारणैक-निपुणौ सद्-धर्म-संस्थापकौ
लोकानां हित-कारिणौ त्रि-भुवने मान्यौ शरण्याकरौ
राधा-कृष्ण-पदारविन्द-भजनानन्देन मत्तालिकौ
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
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- पद 5भजनकूजत्-कोकिल-हंस-सारस-गणाकीर्णे मयूराकुले
नाना-रत्न-निबद्ध-मूल-विटप-श्री-युक्त-वृन्दावने
राधा-कृष्णम् अहर्-निशं प्रभजतौ जीवार्थदौ यौ मुदा
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ - पद 6भजनसङ्ख्या-पूर्वक-नाम-गान-नतिभिः कालावसानी-कृतौ
निद्राहार-विहारकादि-विजितौ चात्यन्त-दीनौ च यौ
राधा-कृष्ण-गुण-स्मृतेर् मधुरिमानन्देन सम्मोहितौ
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ - पद 7भजनराधा-कुण्ड-तटे कलिन्द-तनया-तीरे च वंशीवटे
प्रेमोन्माद-वशाद् अशेष-दशया ग्रस्तौ प्रमत्तौ सदा
गायन्तौ च कदा हरेर् गुण-वरं भावाभिभूतौ मुदा
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
6 पद भजन में
- पद 1भजनकृष्ण-नाम धरे कोतो बल्
विषय-वासनानले, मोर चित्त सदा ज्वले,
रवि-तप्त मरु-भूमि-सम्
कर्न-रन्ध्र-पथ दिया, हृदि माझे प्रवेशिया, … - पद 4भजनकोरि' एतो उपद्रव, चित्ते वर्षे सुधा-द्रव,
मोरे डारे प्रेमेर सागरे
किछु ना बुझिते दिलो, मोरे तो’ बातुल कोइलो,
मोर चित्त-वित्त सब हरे
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- पद 5भजनलोइनु आश्रोय जा’र्, हेनो व्यवहार ता’र्,
वर्निते ना पारि ए सकल्
कृष्ण-नाम इच्छा-मोय्, जाहे जाहे सुखी होय्,
सेइ मोर सुखेर सम्बल् - पद 6भजनप्रेमेर कलिका नाम्, अद्भुत रसेर धाम्,
हेनो बल करये प्रकाश्
ईषत् विकशि’ पुनः, देखाय् निज-रूप-गुन,
चित्त हरि’ लोय कृष्ण-पाश् - पद 7भजनपूर्न विकशित होइया, ब्रजे मोरे जाय लोइया,
देखाय् मोरे स्वरूप-विलास्
मोरे सिद्ध-देह दिया, कृष्ण-पाशे राखे गिया,
ए देहेर कोरे सर्व-नाश् - पद 8भजनकृष्ण-नाम-चिन्तामणि, अखिल रसेर खनि,
नित्य-मुक्त शुद्ध-रस-मोय्
नामेर बालाइ जत, सब लो’ये होइ हत,
तबे मोर सुखेर उदोय्
8 पद भजन में
6
- पद 1भजनकृष्ण-प्रेम-मयी राधा
राधा प्रेम-मयो हरिः
जीवने निधने नित्यं
राधा-कृष्णौ गतिर् मम - पद 2भजनकृष्णस्य द्रविनं राधा
राधाया द्रविनं हरिः
जीवने निधने नित्यं
राधा-कृष्णौ गतिर् मम
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- पद 3भजनकृष्ण-प्राण-मयी राधा
राधा-प्राण-मयो हरिः
जीवने निधने नित्यं
राधा-कृष्णौ गतिर् मम - पद 4भजनकृष्ण-द्रव-मयी राधा
राधा-द्रव-मयो हरिः
जीवने निधने नित्यं
राधा-कृष्णौ गतिर् मम - पद 5भजनकृष्ण-गेहे स्थिता राधा
राधा-गेहे स्थितो हरिः
जीवने निधने नित्यं
राधा-कृष्णौ गतिर् मम - पद 6भजनकृष्ण-चित्त-स्थिता राधा
राधा-चित्त-स्थितो हरिः
जीवने निधने नित्यं
राधा-कृष्णौ गतिर् मम - पद 7भजननीलाम्बर-धरा राधा
पीताम्बर-धरो हरिः
जीवने निधने नित्यं
राधा-कृष्णौ गतिर् मम - पद 8भजनवृन्दावनेश्वरी राधा
कृष्णो वृन्दावनेश्वरः
जीवने निधने नित्यं
राधा-कृष्णौ गतिर् मम
9 पद भजन में
- पद 1भजनश्री-कृष्ण-तत्त्व-निर्देशे कृपा यस्य प्रयोजनम्
वन्दे तं ज्ञानदं कृष्ण-चैतन्यं रस-विग्रहम् - पद 4भजनआसीद् एकः परः कृष्णो नित्य-लीला-परायणः
चिच्-छक्त्याविष्कृते धाम्नि नित्य-सिद्ध-गणाश्रिते
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- पद 8भजनऐश्वर्य-कर्षिता एके नारायण-परायणाः
माधुर्य-मोहिताश् चान्ये कृष्ण-दासाः सुनिर्मलाः - पद 13भजनयम् ऐश्वर्य-परा जीवा नारायणं वदन्ति हि
माधुर्य-रस-सम्पन्नाः कृष्णम् एव भजन्ति तम् - पद 14भजनरस-भेद-वशाद् एको द्विधा भाति स्वरूपतः
अद्वयः स परः कृष्णो विलासानन्द-चन्द्रमाः - पद 19भजनशान्त-भावस् तथा दास्यं सख्यं वात्सल्यम् एव च
कान्त-भाव इति ज्ञेयाः सम्बन्धाः कृष्ण-जीवयोः - पद 25भजनशान्ता दासाः सखाश् चैव पितरो योषितस् तथा
सर्वे ते सेवका ज्ञेयाः सेव्यः कृष्णः प्रियः सताम् - पद 31भजनजीवानां सिद्ध-सत्त्वानां नित्य-सिद्धिमताम् अपि
एतन् नित्य-सुखं शश्वत् कृष्ण-दास्ये नियोजितम् - पद 34भजनयस्येह वर्तते प्रीतिः कृष्णे व्रज-विलासिनि
तस्यैवात्म-समाधौ तु वैकुण्ठो लक्ष्यते स्वतः
8 पद भजन में
- पद 1भजनभाद्र-कृष्ण-अष्टमीते देबकी-उदरे
जन्मिलेन कृष्णचन्द्र श्री-मथुरा-पुरे - पद 3भजनवसुदेब थु-इल निया नन्द-घोषेर घरे
नन्देर अलये कृष्ण दिन दिन बाडे
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- पद 9भजनअनन्त राखिल नाम अन्त ना पा-इया
कृष्ण-नाम राखे गर्ग ध्यानेते जानिया - पद 29भजनअनन्त कृष्णेर नाम अनन्त महिमा
नारदादि ब्यासदेब दिते नारे सीमा - पद 30भजन. नाम भज नाम चिन्त नाम कर सार
अनन्त कृष्णेर नाम महिमा अपार - पद 31भजनशङ्ख-भरि सुबर्ण गो-कोटि करे दान
तथापि ना हय कृष्ण-नामेर समान - पद 32भजनये-इ नाम से-इ कृष्ण भज निष्ठा करि
नामेर सहित आछेन आपनि श्री-हरि - पद 36भजनअष्टोत्तर-शत नाम ये करे पठन
अनायासे पाय राधा-कृष्णेर चरण
7 पद भजन में
- पद 1भजनधन जन देह गेह कृष्णे समर्पण
कोरियाछो शुद्ध-चित्ते कोरोहो स्मरण - पद 2भजनतबे केनो मम सुत बोलि' कोरो दुःख
कृष्ण निलो निज-जन ताहे तार सुख
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- पद 3भजनकृष्ण-इच्छा-मते सब घटय घटना
ताहे सुख-दुःख-ज्ञान अबिद्या-कल्पना - पद 4भजनजाहा इच्छा कोरे कृष्ण ताइ जानो भाल
त्यजिया आपन इच्छा घुचाओ जञ्जाल - पद 5भजनदेय कृष्ण नेय कृष्ण पाले कृष्ण सबे
राखे कृष्ण मारे कृष्ण इच्छा कोरे जबे - पद 6भजनकृष्ण-इच्छा बिपरीत जे कोरे बासना
तार इच्छा नाहि फले से पाय जातना - पद 7भजनत्यजिया सकल शोक शुनो कृष्ण-नाम
परम आनन्द पबे पूर्ण हबे काम
5 पद भजन में
8
- पद 2भजनकौरविन्द-कान्ति-निन्दि-चित्र-पट्ट-शाटिका
कृष्ण-मत्त-भृङ्ग-केलि-फुल्ल-पुष्प-वाटिका
कृष्ण-नित्य-सङ्गमार्थ-पद्म-बन्धु-राधिका
मह्यम् आत्म-पाद-पद्म-दास्य-दास्तु राधिका - पद 6भजननित्य-नव्य-रूप-केलि-कृष्ण-भाव-सम्पदा
कृष्ण-राग-बन्ध-गोप-यौवतेषु कम्पदा
कृष्ण-रूप-वेश-केलि-लग्न-सत्-समाधिका
मह्यम् आत्म-पाद-पद्म-दास्य-दास्तु राधिका
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
- पद 7भजनस्वेद-कम्प-कण्टकाश्रु-गद्गदादि-सञ्चिता
मर्ष-हर्ष-वामतादि-भाव-भुषणाञ्चिता
कृष्ण-नेत्र-तोषि-रत्न-मण्डनालि-दाधिका
मह्यम् आत्म-पाद-पद्म-दास्य-दास्तु राधिका - पद 8भजनया क्षणार्ध-कृष्ण-विप्रयोग-सन्ततोदिता
नेक-दैन्य-चापलादि-भाव-वृन्द-मोदिता
यत्न-लब्ध-कृष्ण-सङ्ग-निर्गताखिलाधिका
मह्यम् आत्म-पाद-पद्म-दास्य-दास्तु राधिका - पद 9भजनअष्टकेन यस् त्व् अनेन नौति कृष्ण-वल्लभां
दर्शने 'पि शैलजादि-योषिदालि-दुर्लभाम्
कृष्ण-सङ्ग-नन्दितात्म-दास्य-सीधु-भाजनं
तं करोति नन्दितालि-सञ्चयाशु सा जनम्
6 पद भजन में
- पद 1भजनजय कृष्ण चैतन्य नित्यानन्द चन्द्र
अद्वैत आचार्य जय गौर-भक्त-वृन्द - पद 2भजनराधे कृष्ण गोविन्द यमुना बृन्दाबन
श्री-चैतन्य नित्यानन्द रूप सनातन
इस भजन में 4 और मिलान दिखाएँ
6 पद भजन में
- पद 3भजनकिशोर बयस कृष्ण जौबनेर छटा
श्यामसुन्दर कृष्ण जेन जलधर-पाटा - पद 9भजनचारि-द्वारे चारि-द्वारी से चारि गोयाल्
कृष्णेर समान बेश देखिते रसाल्
इस भजन में 4 और मिलान दिखाएँ
1 पद भजन में
- पद 1भजनजय जशोदा-नन्दन कृष्ण गोपाल गोबिन्द
जय मदन-मोहन हरे अनन्त मुकुन्द
5 पद भजन में
- पद 1भजनशुनो हे रसिक-जन कृष्ण-गुण अगणन
अनन्त कहिते नाहि पारे
कृष्ण जगतेर गुरु कृष्ण बञ्छा-कल्प-तरु
नाबिक से भब-पाराबारे - पद 2भजनहृदोय पीडित जा'र कृष्ण चिकित्सक ता'र
भब-रोग नाशिते चतुर
कृष्ण-बहिर्मुख-जने प्रेमामृत-बितरणे
क्रमे लोय निज अन्तःपुर
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
- पद 3भजनकर्म-बन्ध ज्ञान-बन्ध आबेशे मानब अन्ध
ता'र कृष्ण कोरुणा-सागर
पद-पद्म-मधु दिया अन्ध-भाब घुचाइया
चरणे कोरेन अनुचार - पद 4भजनबिधि-मार्ग-रत-जने स्वाधीनत-रत्न-दने
राग-मार्गे कोरान प्रबेश
राग-बश-वर्ती हो'ये पारकीय-भाबाश्रोये
लभे जीब कृष्ण-प्रेमाबेश - पद 5भजनप्रेमामृत-बारि-धारा सदा पान-रत ताँर
कृष्ण ताँहादेर बन्धु पति
सेइ सब ब्रज-जन सु-कल्याण-निकेतन
दीन-हीन-बिनोदेर गति
1 पद भजन में
- पद 8भजनमाथुरं विकुण्ठतो ‘पि जन्म-धाम दुर्लभं
वासकाननं ततो ऽपि पाणिना धृतो गिरिः
श्री-हरेस् ततो ऽपि यत् परं सरो ऽति-पावनं
तत्र कृष्ण-कुण्ड एव संस्थितिः स्तुतास्तु नः