श्री कुन्ती स्तुति
कुन्त्य् उवाच
श्रीमद्भागवत की स्तुतियाँ में 24 भजन हैं।
श्रीमद्भागवत में भगवान को अर्पित स्तुतियाँ, स्कन्ध के क्रम में: महारानी कुन्ती, भीष्मदेव, शुकदेव गोस्वामी, ब्रह्मा जी, देवहूति, ध्रुव, पृथु, शिव जी, प्रह्लाद, गजेन्द्र, अम्बरीष, गोपियाँ, अक्रूर, मुचुकुन्द, साकार वेद तथा अन्य भक्त। हर पृष्ठ पर संस्कृत श्लोक और उसका हिन्दी अर्थ दिया गया है। हिन्दी अर्थ इस साइट के लिए मूल श्लोकों से तैयार किए गए हैं।
24 भजन
कुन्त्य् उवाच
श्री-भीष्म उवाच
श्री-शुक उवाच
ब्रह्मोवाच
देवहूतिर् उवाच
ध्रुव उवाच
पृथुर् उवाच
श्री-रुद्र उवाच
श्री-प्रजापतिर् उवाच
अहं हरे तव पादैक-मूल
चित्रकेतुर् उवाच
श्री-प्रह्राद उवाच
श्री-गजेन्द्र उवाच
श्री-अदितिर् उवाच
श्री-राजोवाच
अम्बरीष उवाच
सत्य-व्रतं सत्य-परं त्रि-सत्यं
कृष्ण कृष्ण महा-योगिंस्
श्री-ब्रह्मोवाच
नाग-पत्न्य ऊचुः
गोप्य ऊचुः
श्री-अक्रूर उवाच
श्री-मुचुकुन्द उवाच
श्री-श्रुतय ऊचुः