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“जय राधा माधव” के परिणाम

536 भजन · 902 पद भजन के शब्दों में · 608 पद अर्थ में

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6 पद भजन में 6 पद अर्थ में 1

वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    मेरी पलकोँ मेँ राधा, मेरी अलकोँ मेँ राधा
    मैने माङ्ग भराइ राध नामकी
  • पद 2भजन
    मेरे नैनोँ मेँ राधा, मेरे बैनोँ मेँ राधा
    मैने बैनी गुथाइ राध नामकी
  • पद 1अर्थ
    मेरी पलकों में राधा हैं, मेरी अलकों में राधा हैं। मैंने अपनी मांग को राधा के मधुर नाम से भर दिया है।
  • पद 2अर्थ
    मेरे नयनों में राधा हैं, मेरे वचनों में राधा हैं। मैंने अपने हर वचन को राधा के मधुर नाम से गूँथ दिया है।
इस भजन में 8 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    मेरी दुलरी मेँ राधा, मेरी चुनरी मेँ राधा
    मैने नथनी सजाइ राध नामकी
  • पद 4भजन
    मेरे चलने मेँ राधा, मेरे हलने मेँ राधा
    कटि किङ्किनी बजाइ राध नामकी
  • पद 5भजन
    मेरे दाये बाये राधा, मेरे आगे पीछे राधा
    रोम रोम रस छाइ राध नामकी
  • पद 6भजन
    मेरे अङ्ग अङ्ग राधा, मेरे सङ्ग सङ्ग राधा
    गोपाल् बंशी बजाइ राध नामकी
  • पद 3अर्थ
    मेरी दुलड़ी में राधा हैं, मेरी चुनरी में राधा हैं। मैंने अपनी नथनी को राधा के मधुर नाम से सजाया है।
  • पद 4अर्थ
    मेरे चलने में राधा हैं, मेरे हिलने-डुलने में राधा हैं। मेरी कटि की किंकिणी राधा के मधुर नाम से बज उठती है।
  • पद 5अर्थ
    मेरे दाएँ राधा हैं, मेरे बाएँ राधा हैं। मेरे आगे राधा हैं, मेरे पीछे राधा हैं। मेरे रोम-रोम में राधा के मधुर नाम का रस छा गया है।
  • पद 6अर्थ
    मेरे अंग-अंग में राधा हैं, मेरे साथ-साथ राधा हैं। गोपाल अपनी बाँसुरी पर राधा का मधुर नाम पुकारते हैं।
12 पद भजन में

जयदेव गोस्वामी

  • पद 1भजन
    प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं विहित-वहित्र-चरित्रम् अखेदम्
    केशव धृत-मीन-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 2भजन
    क्षितिर् इह विपुलतरे तिष्ठति तव पृष्ठे
    धरणि-धरण-किण-चक्र-गरिष्ठे
    केशव धृत-कूर्म-शरीर जय जगदीश हरे
इस भजन में 10 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    वसति दशन-शिखरे धरणी तव लग्ना
    शशिनि कलङ्क-कलेव निमग्ना
    केशव धृत-शूकर-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 4भजन
    तव कर-कमल-वरे नखम् अद्भुत-शृङ्गं
    दलित-हिरण्यकशिपु-तनु-भृङ्गम्
    केशव धृत-नरहरि-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 5भजन
    छलयसि विक्रमणे बलिम् अद्भुत-वामन
    पद-नख-नीर-जनित-जन-पावन
    केशव धृत-वामन-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 6भजन
    क्षत्रिय-रुधिर-मये जगद्-अपगत-पापं
    स्नपयसि पयसि शमित-भव-तापम्
    केशव धृत-भृगुपति-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 7भजन
    वितरसि दिक्षु रणे दिक्-पति-कमनीयं
    दश-मुख-मौलि-बलिं रमणीयम्
    केशव धृत-राम-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 8भजन
    वहसि वपुषि विशदे वसनं जलदाभं
    हल-हति-भीति-मिलित-यमुनाभम्
    केशव धृत-हलधर-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 9भजन
    निन्दसि यज्ञ-विधेर् अहह श्रुति-जातं
    सदय-हृदय दर्शित-पशु-घातम्
    केशव धृत-बुद्ध-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 10भजन
    म्लेच्छ-निवह-निधने कलयसि करवालं
    धूमकेतुम् इव किम् अपि करालम्
    केशव धृत-कल्कि-शरीर जय जगदीश हरे
  • पद 11भजन
    श्री-जयदेव-कवेर् इदम् उदितम् उदारं
    शृणु सुख-दं शुभ-दं भव-सारम्
    केशव धृत-दश-विध-रूप जय जगदीश हरे
  • पद 12भजन
    वेदान् उद्धरते जगन्ति वहते भू-गोलम् उद्बिभ्रते
    दैत्यं दारयते बलिं छलयते क्षत्र-क्षयं कुर्वते
    पौलस्त्यं जयते हलं कलयते कारुण्यम् आतन्वते
    म्लेच्छान् मूर्छयते दशाकृति-कृते कृष्णाय तुभ्यं नमः
8 पद भजन में 6

जीव गोस्वामी · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    कृष्ण-प्रेम-मयी राधा
    राधा प्रेम-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 2भजन
    कृष्णस्य द्रविनं राधा
    राधाया द्रविनं हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
इस भजन में 6 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    कृष्ण-प्राण-मयी राधा
    राधा-प्राण-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 4भजन
    कृष्ण-द्रव-मयी राधा
    राधा-द्रव-मयो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 5भजन
    कृष्ण-गेहे स्थिता राधा
    राधा-गेहे स्थितो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 6भजन
    कृष्ण-चित्त-स्थिता राधा
    राधा-चित्त-स्थितो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 7भजन
    नीलाम्बर-धरा राधा
    पीताम्बर-धरो हरिः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
  • पद 8भजन
    वृन्दावनेश्वरी राधा
    कृष्णो वृन्दावनेश्वरः
    जीवने निधने नित्यं
    राधा-कृष्णौ गतिर् मम
9 पद भजन में 2

जयदेव गोस्वामी · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    श्रित-कमला-कुच-मण्डल (हे)
    धृत-कुण्डल (ए)
    कलित-ललित-वन-माला
    जय जय देव हरे
  • पद 2भजन
    दिन-मणि-मण्डल-मण्डन (हे)
    भव-खण्डन (ए)
    मुनि-जन-मानस-हंस
    जय जय देव हरे
इस भजन में 7 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    कालिय-विषधर-गञ्जन (हे)
    जन-रञ्जन (ए)
    यदु-कुल-नलिन-दिनेश
    जय जय देव हरे
  • पद 4भजन
    मधु-मुर-नरक-विनाशन (हे)
    गरुडासन (ए)
    सुर-कुल-केलि-निदान
    जय जय देव हरे
  • पद 5भजन
    अमल-कमल-दल-लोचन (हे)
    भव-मोचन (ए)
    त्रिभुवन-भुवन-निधान
    जय जय देव हरे
  • पद 6भजन
    जनक-सुता-कृत-भूषण (हे)
    जित-दूषण (ए)
    समर-शमित-दश-कण्ठ
    जय जय देव हरे
  • पद 7भजन
    अभिनव-जलधर-सुन्दर (हे)
    धृत-मन्दर (ए)
    श्री-मुख-चन्द्र-चकोर
    जय जय देव हरे
  • पद 8भजन
    तव चरणं प्रणत वयम् (हे)
    इति भावय (ए)
    कुरु कुशलम् प्रणतेषु
    जय जय देव हरे
  • पद 9भजन
    श्री-जयदेव-कवेर् इदं (हे)
    कुरुते मुदम् (ए)
    मङ्गलम् उज्ज्वल-गीतं
    जय जय देव हरे
5 पद भजन में 7 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतावली

  • पद 1भजन
    राधा-भजने जदि मति नाहि भेला
    कृष्ण-भजन तब अकारण गेला
  • पद 2भजन
    आतप रोहित सूरय नाहि जानि
    राधा-बिरहित माधब नाहि मानि
  • पद 1अर्थ
    यदि तुम्हारा मन श्री राधा की भक्ति में नहीं लगता, तो तुम्हारी कृष्ण-भक्ति व्यर्थ चली जाती है।
  • पद 2अर्थ
    मैं जानता हूँ कि सूर्य कभी सूर्य-प्रकाश के बिना नहीं होता। उसी प्रकार मैं जानता हूँ कि श्रीकृष्ण कभी राधा के बिना नहीं होते।
इस भजन में 8 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    केबल माधब पूजये स अज्ञानी
    राधा अनादर कोरो-इ अभिमानी
  • पद 7भजन
    उमा रमा सत्या शची चन्द्रा रुक्मिणी
    राधा-अबतार सबे - आम्नाय-बाणी
  • पद 8भजन
    हेनो राधा-परिचर्जा जाङ्कर धन
    भकतिबिनोद ताँ'र मागये चरण
  • पद 3अर्थ
    जो राधा के बिना केवल श्रीकृष्ण की पूजा करता है, वह मूर्ख है। जो राधा का अनादर करता है, वह अभिमानी है।
  • पद 5अर्थ
    यदि तुम स्वयं को राधा की दासी मानोगे, तो गोकुल के श्रीकृष्ण तुमसे शीघ्र ही मिलेंगे।
  • पद 6अर्थ
    ब्रह्मा, शिव, नारद, वेद और नारायणी (लक्ष्मी), ये सभी श्री राधा के चरणों की रज को आदरपूर्वक पूजते हैं।
  • पद 7अर्थ
    पार्वती, लक्ष्मी, सत्यभामा, शची, चन्द्रावली और रुक्मिणी, ये सब श्री राधा के ही अवतार हैं। यह वेदों का वचन है।
  • पद 8अर्थ
    श्री राधा की ऐसी सेवा जिनका एकमात्र धन है, भक्तिविनोद उन्हीं के चरणों की भिक्षा माँगते हैं।
3 पद भजन में 4 पद अर्थ में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 10भजन
    जय जय ललिता-कुण्ड जय श्याम-कुण्ड
    जय जय राधा-कुण्ड प्रताप प्रचण्ड
  • पद 13भजन
    जय जय केशि-घाट परम मोहन
    जय बंशी-बट राधा-कृष्ण मनोरम
  • पद 10अर्थ
    जय जय ललिता-कुण्ड की! जय श्याम-कुण्ड की! जय जय राधा-कुण्ड की, जो परम गौरवमय है!
  • पद 13अर्थ
    जय जय केशी-घाट की, जो परम मनोहर है! जय वंशी-वट की, जो श्री राधा-कृष्ण के हृदय को आनन्दित करता है!
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
  • पद 17भजन
    जय जय बृषभानु-पुर नामे ग्राम
    जय जय सङ्केट राधा-कृष्ण-लीला-स्थान
  • पद 16अर्थ
    जय जय यावट-ग्राम की, जो अभिमन्यु का घर है! वहाँ राधा और उनकी सखियाँ सदा विराजमान रहती हैं।
  • पद 17अर्थ
    जय जय वृषभानु-पुर नामक ग्राम की! जय जय संकेट की, जहाँ राधा-कृष्ण अनेक लीलाएँ करते हैं!
4 पद भजन में 2 पद अर्थ में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय जय श्री-जनार्दन हरि
    जय राधिका-बल्लभ भुबन-दुर्लभ
    कंसासुर-ध्वंस-कारी
  • पद 2भजन
    जय गोपी-बिमोहन राधिका-रमण
    श्री-बृन्दारण्य-बिहारी
    जय जय यदु-पति अगतिर गति
    पूतना-बक-अघारी
  • पद 1अर्थ
    जय जय हे प्रभु हरि, हे जनार्दन! जय हो, हे राधा के प्रिय, हे संसार में दुर्लभ धन, हे कंसासुर के हन्ता!
  • पद 2अर्थ
    जय हो, हे गोपियों को मोहित करने वाले, हे राधा के साथ लीला करने वाले, हे वृन्दावन में विचरण करने वाले! जय जय हो, हे यादवों के स्वामी, हे शरणहीनों की शरण, हे पूतना, बक और अघ के शत्रु!
इस भजन में 2 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    जय पप-बिनाशन दुष्कृत-नाशन
    गरुडासन-शोभा-कारी
    जय यशोदानन्दन आनन्द-बर्धन
    आनन्द-घन-रूप-धारी
  • पद 4भजन
    जय पप-बिमोचन तप-निरासन
    जीबेर त्रि-ताप-हारी
3 पद भजन में 3 पद अर्थ में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय जय गोबिन्द गोपाल गदाधर
    कृष्णचन्द्र कर कृपा करुणा-सागर
  • पद 2भजन
    जय गुरु गोबिन्द गोपेश गिरिधारी
    श्री-राधिकार प्राण-धन मुकुन्द मुरारि
  • पद 1अर्थ
    जय जय हो आपकी, हे गोविन्द, जो गौओं की रक्षा करते हैं और गदा धारण करते हैं। हे कृष्णचन्द्र, हे करुणा के सागर, मुझ पर कृपा करें।
  • पद 2अर्थ
    जय हो आपकी, हे गोविन्द, हे स्वामी, हे गोपबालकों के स्वामी, हे गोवर्धन-गिरिधारी, हे श्री राधिका के प्राण-धन, हे मुक्तिदाता, हे मुरारि!
इस भजन में 2 और मिलान दिखाएँ
  • पद 4भजन
    दिन याय बृथा कजे रात्र याय दिने
    ना भजिलाम राधा-कृष्ण-चरणारबिन्दे
  • पद 4अर्थ
    मैंने अपने दिन-रात निष्फल कर्मों में व्यतीत किए। मैंने श्री राधा-कृष्ण के चरण-कमलों की भक्ति नहीं की।
9 पद भजन में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    श्री बिन्दु-माधवाष्टक
    कलिन्दजा-तटाटवी-लता-निकेतनान्तर
    प्रगल्भ-बल्लवी-स्फुरद्-रति-प्रसङ्ग-सङ्गतम्
    सुधा-रसार्द्र-वेणु-नाद-मोद-माधुरी-मद …
  • पद 2भजन
    गदारि=शङ्ख-चक्र-शार्ङ्ग-भृच्-चतुष्-करं कृपा
    कटाक्ष-वीक्षणामृतोक्षितामरेन्द्र=नन्दनम्
    सनन्दनादि-मौनि-मानसारविन्द-मन्दिरं
    जगत्-पवित्र-कीर्ति-दं भजामि बिन्दु-माधवम्
इस भजन में 7 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    दिग्-ईश-मौलि-नूत्न-रत्न-निःसरत्-प्रभावली
    विराजिताङ्घ्रि-पङ्कजं नतेन्दु-शेखराब्जजम्
    दया-मरन्द-तुन्दिलारविन्द-पत्र-लोचनं
    विरोधि-यूथ-भेदनं भजामि बिन्दु-माधवम्
  • पद 4भजन
    पयः-पयोधि-वीचिकावली-पयः-पृषन्-मिलद्
    भुजाङ्ग-पुङ्गवाङ्ग-कल्प-पुष्प-तल्प-शायिनम्
    कटी-तटी-स्फुटी-भवत्-प्रतप्त-हाटकाम्बरं
    निशात-कोटि-पाटनं भजामि बिन्दु-माधवम्
  • पद 5भजन
    अनुश्रवापहारकावलेप-लोप-नैपुणी
    पयश्चरावतार-तोषितारविन्द-सम्भवम्
    महा-भवाब्धि-मध्य-मग्न-दीन-लोक-तारकं
    विहङ्ग-राट्-तुरङ्गमं भजामि बिन्दु-माधवम्
  • पद 6भजन
    समुद्र-तोय-मध्य-देव-दानवोत्क्षिपद्-धरा
    धरेन्द्र-मूल-धारण-क्षमादि-कूर्म-विग्रहम्
    दुराग्रहावलिप्त-हाटकाक्ष-नाश-शूकरं
    हिरण्य-दानवान्तकं भजामि बिन्दु-माधवम्
  • पद 7भजन
    विरोचनात्म-सम्भवोत्तमाङ्ग-कृत्-पद-क्रमं
    परश्वधोपसंहताखिलावनीश-मण्डलम्
    कठोर-नीलकण्ठ-कार्मुक-प्रदाऋसितादि-दोर्
    बलान्वित-क्षिती=सुतं भजामि बिन्दु-माधवम्
  • पद 8भजन
    यमानुजोदक-प्रवाह-सत्वराभिजित्वरं
    पुरासुराङ्गनाभिमान-भज्जितोपनायकम्
    स्व-मण्डलाग्र-खण्डनीय-यावनारि-मण्डलं
    बलानुजं गदाग्रजं भजामि बिन्दु-माधवम्
  • पद 9भजन
    प्रशस्त-पञ्च-चामराख्य-वृत्त-भेद-भासितं
    दशावतार-वर्णनं नृसिंह-भक्त-वर्णितम्
    प्रसिद्ध-बिन्दु-माधवाष्टकं पठन्ति ये नराः
    सु-दुर्लभं भजन्ति ते मनोरथं निरन्तरम्
3 पद भजन में 13

वासुदेव घोष · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    जय जय जगन्नाथ शचीर नन्दन्
    त्रिभुवने कोरे जार् चरण वन्दन्
  • पद 4भजन
    श्री-राधार् भावे एबे गोरा अवतार्
    हरे कृष्ण नाम् गौर करिल प्रचार्
    ए-बार् प्रचार् जेइ करिल हरे कृष्ण महा-मन्त्र
    प्रचार् जेइ करिल हरे कृष्ण महा-मन्त्र …
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 5भजन
    …ओइ ब्रज हो'ते नदीयारे
    राधा-भाव-कान्ति लोये ब्रज हो'ते नदीयारे
    सेइ तो' एसेछे
    ए-बार् गोविन्द गौराङ्ग हो'ये सेइ तो' एसेछे …
4 पद भजन में

गोविन्द दास कविराज

  • पद 1भजन
    नन्द-नन्दनगोपीजन-बल्लभ
    राधा-नायक नागर श्याम
    सो शची-नन्दन नदीया-पुरन्दर
    सुर-मुनि-गण-मनो-मोहन धाम
  • पद 2भजन
    जय निज-कान्ता-कान्ति-कलेबर
    जय जय प्रेयसी-भाब-बिनोद
    जय ब्रज-सहचरी-लोचन-मङ्गल
    नदीया-बधूजन-नयन-आमोद
इस भजन में 2 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    जय जय श्रीदाम-सुदाम-सुबलार्जुन-
    प्रेम-प्रबर्धन नब-घन-रूप
    जय रामादि-सुन्दर- प्रिय-सहचर
    जय जय मोहन गौर अनूप
  • पद 4भजन
    जय अति-बलबलराम-प्रियानुज
    जय जय नित्यानन्द-आनन्द
    जय जय सज्-जन- गण-भय-भञ्जन
    गोबिन्द-दास-आश-अनुबन्ध
8 पद भजन में

माधवेन्द्र पुरी

  • पद 1भजन
    वृन्दावन-विहाराढ्यौ
    सच्चिदानन्द-विग्रहौ
    मणि-मण्डप-मध्यस्थौ
    राधा-कृष्णौ नमाम्य् अहम्
  • पद 2भजन
    पीत-नील-पटौ शान्तौ
    श्याम-गौर-कलेवरौ
    सदा रास-रतौ सत्यौ
    राधा-कृष्णौ नमाम्य् अहम्
इस भजन में 6 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    भावाविष्टौ सदा रम्यौ
    रास-चातुर्य-पण्डितौ
    मुरली-गान-तत्त्व-ज्ञौ
    राधा-कृष्णौ नमाम्य् अहम्
  • पद 4भजन
    यमुनोप-वनावासौ
    कदम्ब-नव-मन्दिरौ
    कल्प-द्रुम-वनाधीशौ
    राधा-कृष्णौ नमाम्य् अहम्
  • पद 5भजन
    यमुना-स्नान-सुभगौ
    गोवर्धन-विलासिनौ
    दिव्य-मन्दार-मालाढ्यौ
    राधा-कृष्णौ नमाम्य् अहम्
  • पद 6भजन
    मञ्जीर-रञ्जित-पदौ
    नासाग्र-गज-मौक्तिकौ
    मधुर-स्मेर-सुमुखौ
    राधा-कृष्णौ नमाम्य् अहम्
  • पद 7भजन
    अनन्त-कोटि-ब्रह्माण्डे
    सृष्टि-स्थित्य्-अन्त-कारिणौ
    मोहिनौ सर्व-लोकानां
    राधा-कृष्णौ नमाम्य् अहम्
  • पद 8भजन
    परस्पर-रसाविष्टौ
    परस्पर-गण-प्रियौ
    रस-सागर-सम्पन्नौ
    राधा-कृष्णौ नमाम्य् अहम्
2 पद भजन में 8

कृष्ण दास · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 2भजन
    श्यम-कुन्ड, राधा-कुण्ड, गिरि-गोवर्धन्
    कालिन्दि जमुना जय, जय महावन्
  • पद 9भजन
    श्री-रस-मण्डल जय, जय राधा-श्याम्
    जय जय रस-लीला सर्व-मनोरम्
3 पद भजन में 1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतमाला

  • पद 1भजन
    नायिकार शिरोमणि ब्रजे राधा ठाकुराणी
    पञ्च-बिध सखी-गण ता'र
    सखी नित्य-सखी आर प्राण-सखी अतः पर
    प्रिया-सखी एइ होइलो चार
  • पद 4भजन
    कुरङ्गाक्षी मञ्जुकेशी सुमध्या मदनालसी
    कमला माधुरी कामलता
    कन्दर्पसुन्दरी आर माधबी मालती आर
    शशिकला राधा-सेबा-रत
  • पद 4अर्थ
    प्रिय-सखियों में कुरंगाक्षी, मञ्जुकेशी, सुमध्या, मदनालसी, कमला, माधुरी, कामलता, कन्दर्पसुन्दरी, माधवी, मालती और शशिकला सम्मिलित हैं। ये सभी श्री राधा की सेवा में समर्पित हैं।
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 5भजन
    ललिता बिशाखा चित्रा तुङ्गबिद्या चम्पलता
    इन्दुलेखा रङ्ग-देबी सती
    सुदेबीति अष्ट-जन परम-प्रेष्ठ सखी-गण
    राधा-कृष्णे सेबे एक मति
2 पद भजन में 2 पद अर्थ में

वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    जय राधे जय राधे राधे जय राधे जय श्री-राधे
    जय कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण जय श्री-कृष्ण
  • पद 11भजन
    राधा-नामिनि गुण-अभिरामिनि हरि-प्रिय-स्वामिनी श्री-राधे
    हरे-हरे-हरि हरे-हरे-हरि हरे-हरे-हरि श्री-कृष्ण
  • पद 1अर्थ
    जय राधे जय राधे राधे जय राधे जय श्री-राधे! जय कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण जय श्री-कृष्ण!
  • पद 11अर्थ
    हे श्री राधे! आप “राधा” नाम से विभूषित हैं, अपने गुणों से सबको आनन्द देती हैं, और हरि की प्रिया स्वामिनी हैं। हरे हरे हरि, हरे हरे हरि, हरे हरे हरि, श्री कृष्ण!
2 पद भजन में 2 पद अर्थ में

जयदेव गोस्वामी

  • पद 1भजन
    नाथ हरि जगन्नाथ हरि सीदति राधा'वास-गृहे
  • पद 3भजन
    श्री-जयदेव-कवेर् इदम् उदितम्
    रसिक-जनम् तनुताम् अतिमुदितम्
  • पद 1अर्थ
    हे नाथ हरि, हे जगन्नाथ हरि, राधा उस घर में विकल हो रही है जहाँ वह तुम्हारे लिए तरस रही है।
  • पद 3अर्थ
    कवि श्री जयदेव द्वारा रचित यह गीत, इसके रस का आस्वादन करने वालों को महान आनन्द प्रदान करे।
2 पद भजन में 3

हरिव्यास देवाचार्य

  • पद 1भजन
    जय राधे जय राधे राधे
    जय राधे जय श्री-राधे
    जय कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण जय श्री-कृष्ण
  • पद 11भजन
    राधा-नामिनि गुण-अभिरामिनि
    हरि-प्रिय-स्वामिनी श्री-राधे
    हरे-हरे-हरि हरे-हरे-हरि
    हरे-हरे-हरि श्री-कृष्ण
4 पद भजन में 4 पद अर्थ में 1

भक्तिविनोद ठाकुर · कल्याण-कल्पतरु

  • पद 1भजन
    जय जय श्री-चैतन्य पतित-पाबन
    जय नित्यानन्द प्रभु अनाथ-तरण
  • पद 2भजन
    जय जयाद्वैतचन्द्र कृपार सागर
    जय रूप-सनातन जय गदाधर
  • पद 1अर्थ
    जय जय श्री चैतन्य, पतितों के उद्धारक! जय नित्यानन्द प्रभु, अनाथों के तारणहार!
  • पद 2अर्थ
    जय जय अद्वैतचन्द्र, कृपा के सागर! जय रूप गोस्वामी और सनातन गोस्वामी! जय गदाधर पंडित!
इस भजन में 4 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    श्री-जीब गोपाल-भट्ट रघुनाथ-द्वोय
    जय ब्रज-धाम-बासी बैष्णब-निचोय
  • पद 4भजन
    जय जय नबद्वीप-बासी भक्त-गण
    सबे मिलि' कृपा मोरे कोरो बितरण
  • पद 3अर्थ
    जय श्री जीव गोस्वामी, गोपाल भट्ट गोस्वामी, रघुनाथ दास गोस्वामी और रघुनाथ भट्ट गोस्वामी की! जय व्रज-धाम के निवासियों की, और सभी वैष्णवों की!
  • पद 4अर्थ
    जय जय नवद्वीप में रहने वाले भक्तों की! आप सभी मिलकर मुझ पर कृपा करें।
2 पद भजन में 1 पद अर्थ में 1

नरोत्तम दास ठाकुर · प्रार्थना

  • पद 1भजन
    राधा-कृष्ण! निवेदन एइ जन करे
    दोँह अति रसमय स करुण-हृदय
    अवधान कर नाथ मोरे
  • पद 4भजन
    जय राधे जय कृष्ण जय जय राधे कृष्ण
    कृष्ण कृष्ण जय जय राधे
    अँजलि मस्तके धरि नरोत्तम भूमे पडि
    कहे दोँहे पुराओ मन-साधे
  • पद 4अर्थ
    जय राधे, जय कृष्ण, जय जय राधे-कृष्ण! कृष्ण कृष्ण, जय जय राधे! नरोत्तम अपने सिर पर हाथ जोड़कर भूमि पर गिर पड़ते हैं और कहते हैं, हे राधा-कृष्ण, मेरे मन की इस इच्छा को पूर्ण करो।
2 पद भजन में 1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतावली

  • पद 1भजन
    राधा-बल्लभ राधा-बिनोद
    राधा-माधब राधा-प्रमोद
  • पद 2भजन
    राधा-रमण राधा-नाथ
    राधा-बरणामोद
    राधा-रसिक राधा-कान्त
    राधा-मिलन-मोद
  • पद 1अर्थ
    हे राधा के प्रिय (राधा-वल्लभ), हे राधा के साथ लीला करने वाले (राधा-विनोद), हे राधा के पति (राधा-माधव), हे राधा के आनन्द-स्वरूप (राधा-प्रमोद)!