सम्बन्धाधिदेव प्रणाम
जयतां सुरतौ पङ्गोर् मम मन्द-मतेर् गती
श्रीमान जय शचीनन्दन प्रभु की 157 रिकॉर्डिंग। ऑडियो इस्कॉन डिज़ायर ट्री के सौजन्य से चलता है।
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जयतां सुरतौ पङ्गोर् मम मन्द-मतेर् गती
सर्वस्व तोमार्, चरणे संपिया,
संसार-दावानल-लीढ-लोक
सुन्दर कुण्डल नैन विशाल, गले सोहे वैजन्ती-माला
सुन्दर-बाला शची-दुलाला
हरि बोलो हरि बोलो हरि बोलो भाइ रे
हरि हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिन
हरि हरि कबे मोर हो'बे हेनो दिन
हरि हरि! बिफले जनम गोँआइनु
हरि हे दोयाल् मोर् जय राधा-नाथ्
हुहुङ्कार-गर्जनादि अहो-रात्र-सद्-गुणं
हे गोविन्द हे गोपाल