Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

तुवा भक्ति प्रतिकूल धर्म जा’ते रोय्

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टेक्स्ट
तुवा-भक्ति-प्रतिकूल धर्म जा’ते रोय् परम जतने ताहा त्यजिबो निश्चोय्
अर्थ

आपकी भक्ति के प्रतिकूल जो कुछ भी है, उसे मैं बड़ी सावधानी से अवश्य त्याग दूँगा।

तुवा-भक्ति-बहिर्-मुख सङ्ग ना कोरिबो गौराङ्ग-विरोधि-जन-मुख ना हेरिबो
अर्थ

आपकी भक्ति से विमुख लोगों की संगति मैं नहीं करूँगा। श्री गौरांग के विरोधियों का मुख भी मैं नहीं देखूँगा।

भक्ति-प्रतिकूल स्थाने ना कोरि वसति भक्तिर अप्रिय कार्ये नाहि कोरि रति
अर्थ

भक्ति के प्रतिकूल स्थान में मैं निवास नहीं करूँगा। भक्ति के प्रतिकूल कार्यों में मुझे कोई प्रीति नहीं होगी।

भक्तिर विरोधी ग्रन्थ पाठ ना कोरिबो भक्तिर विरोधी व्याख्या कभु ना शुनिबो
अर्थ

भक्ति के विरोधी ग्रंथों को मैं नहीं पढ़ूँगा। भक्ति के विरोधी व्याख्यानों को मैं कभी नहीं सुनूँगा।

गौराङ्ग-वर्जित स्थान तीर्थ नाहि मानि भक्तिर बाधक ज्ञान-कर्म तुच्छ जानि
अर्थ

श्री गौरांग से रहित स्थान को मैं तीर्थ नहीं मानूँगा। भक्ति में बाधा डालने वाले ज्ञान और कर्म को मैं तुच्छ समझूँगा।

भक्तिर बाधक काले ना कोरि आदर् भक्ति बहिर्-मुख निज-जने जानि पर्
अर्थ

भक्ति में बाधक समय से मुझे कोई प्रेम नहीं होगा। भक्ति से विमुख अपने संबंधियों को भी मैं पराया समझूँगा।

भक्तिर बाधिका स्पृहा कोरिबो वर्जन् अभक्त-प्रदत्त अन्न ना कोरि ग्रहम्
अर्थ

भक्ति में बाधा डालने वाली सब इच्छाओं को मैं त्याग दूँगा। अभक्तों के दिए हुए अन्न को मैं स्वीकार नहीं करूँगा।

जाहा किछु भक्ति-प्रतिकूल बोलि’ जानि त्यजिबो जतने ताहा, ए निश्चोय वानी
अर्थ

भक्ति के प्रतिकूल जो कुछ भी मैं जानूँगा, उसे सावधानी से त्याग दूँगा। यही मेरा दृढ़ संकल्प है।

भकतिविनोद पोडि’ प्रभुर चरणे मागये शकति प्रतिकूल्येर वर्जने
अर्थ

प्रभु के चरणों में गिरकर भक्तिविनोद उस शक्ति की भिक्षा माँगता है, जिससे भक्ति के प्रतिकूल सब कुछ त्यागा जा सके।