Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बस्तुतः सकलि तव, जीव केहो नोय्

बस्तुतः सकलि तव, जीव केहो नोय् `अहम्’-`मम’-भ्रमे भ्रोमि’ भोगे शोक-भोय्
अर्थ

वास्तव में सब कुछ आपका ही है, जीव का अपना कुछ भी नहीं है। परन्तु 'मैं' और 'मेरा' के भ्रम में भटकता हुआ जीव शोक और भय का अनुभव करता है।

अहं-मम-अभिमान एइ-मात्रो धन् बद्ध-जीव निज बोलि’ जाने मने मन्
अर्थ

बद्ध जीव अपने मन में गहराई से 'मैं' और 'मेरा' के इन भ्रमों को ही अपनी एकमात्र संपत्ति मान लेता है।

सेइ अभिमाने आमि संसारे पोडिया हाबुडुबु खाइ भव-सिन्धु साँतारिया
अर्थ

इस भ्रम के कारण संसार में गिरकर, मैं भव-सागर में डूबते-उबरते हुए तैरने का प्रयास कर रहा हूँ।

तोमार अभोय-पदे लोइया शरण् आजि आमि कोरिलाम आत्म-निवेदन्
अर्थ

आपके अभय चरणों की शरण लेकर, आज मैंने अपने आप को आपको सौंप दिया है।

`अहं’-`मम’-अभिमान छाडिलो आमाय् आर् जेनो मम हृदे स्तान नाहि पाय्
अर्थ

'मैं' और 'मेरा' के वे भ्रम अब मुझसे दूर हो गए हैं, ताकि वे फिर कभी मेरे हृदय में स्थान न पा सकें।

एइ मात्रो बल प्रभु! दिबे हे आमारे अहंता-ममता दूरे पारि राखिबारे
अर्थ

हे प्रभु! मुझे केवल यही एक शक्ति दे दीजिए, कि मैं मिथ्या अहंकार और ममता को सदा दूर रख सकूँ।

आत्म-निवेदन-भाव हृदे दृढ रोय् हस्ति-स्नान सम जेनो खनिक ना होय्
अर्थ

आत्म-निवेदन का यह भाव मेरे हृदय में सदा दृढ़ बना रहे, यह हाथी के स्नान के समान क्षणभर के लिए न रहे।

भकतिविनोद प्रभु नित्यानन्द पाय् मागे परसाद, जाहे अभिमान जाय्
अर्थ

श्री नित्यानन्द प्रभु के चरणों में भक्तिविनोद उस कृपा की भिक्षा माँगता है, जिससे 'मैं' और 'मेरा' के ये भ्रम सदा के लिए मिट जाएँ।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
शरणागति
पद
8