Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
छोडतो पुरुष-अभिमान् किङ्कोरी होइलुँ आजि, कान्!
अर्थ

पुरुष-भोक्ता के अभिमान को त्यागकर, हे कान्ह! आज मैं तुम्हारी दासी बन गई हूँ।

बरज-बिपिने सखी-साथ् सेवन कोरोबुँ, राधा-नाथ्!
अर्थ

हे राधानाथ! व्रज के वनों में राधा की सखियों की संगति में, मैं सेवा में लगी रहूँगी।

कुसुमे गाँथोबुँ हार् तुलसी-मणि-मञ्जरी तार्
अर्थ

मैं फूलों की माला गूँथूँगी, जिनके बीच तुलसी की मंजरियाँ रत्नों जैसी सजी होंगी।

जतने देओबुँ सखी-करे हाते लओबो सखी आदरे
अर्थ

मैं उन मालाओं को सावधानी से राधा की एक सखी के हाथों में दूँगी, और वह सखी उन्हें प्रेमपूर्वक अपने हाथों में ले लेगी।

सखी दिबो तुवा दुहुक् गले दूरतो हेरोबुँ कुतूहले
अर्थ

वह सखी उन मालाओं को तुम दोनों के गले में पहना देगी, और मैं दूर से यह दृश्य कौतुक से देखती रहूँगी।

सखी कहबो,—“शुनो सुन्दरी! रहोबि कुञ्जे मम किङ्कोरी
अर्थ

राधा की वह सखी मुझसे कहेगी, 'सुनो सुंदरी! तुम इस वन-कुंज में मेरी दासी बनकर रहो।

गाथबि माला मनोहारिणी निति राधा-कृष्ण-विमोहिनी
अर्थ

प्रतिदिन ऐसी मनोहर मालाएँ गूँथना, जो राधा-कृष्ण को सदा मोहित कर लें।

तुवा रखन-भार हामारा मम कुञ्ज-कुटीर तोहारा
अर्थ

तुम्हारे पालन-पोषण का सारा भार मैं लूँगी। मेरी यह कुंज-कुटिया अब तुम्हारी है।

राधा-माधव-सेवन-काले रहोबि हामार अन्तराले
अर्थ

जब मैं राधा-माधव की सेवा करूँगी, तब तुम मेरे पीछे ही रहना।

ताम्बुल साजि’ कर्पूर आनि’ देओबि मोए आपन जानि’ ”
अर्थ

पान सजाकर, कपूर के साथ लाकर, तुम मुझे अपना ही समझकर दोगी।'

भकतिविनोद शुनि’ बात् सखी-पदे करे प्रनिपात्
अर्थ

यह बात सुनकर भक्तिविनोद ने सखी के चरणों में प्रणाम किया।