Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

ना कोरोलुँ करम

ना कोरोलुँ करम, गेयान नाहि भेलो, ना सेविलुन् चरण तोहार् जड-सुखे मातिया, आपनकु वञ्च-इ, पेखहुँ चौदिश आन्धियार्
अर्थ

मैंने कभी कोई सत्कर्म नहीं किया, न ही कोई ज्ञान प्राप्त किया। मैंने आपके चरणों की सेवा भी नहीं की। सांसारिक सुखों में डूबकर मैंने स्वयं को ही धोखा दिया है, और अब मुझे चारों दिशाओं में केवल अंधकार दिखाई देता है।

तुहुँ नाथ! करुना-निदान् तुवा पद-पङ्कजे, आत्म समर्पिलुँ, मोरे कृपा कोरोबि विधान्
अर्थ

हे नाथ! आप ही करुणा के अनन्त स्रोत हैं। मैंने अपने आप को पूर्णतः आपके चरण-कमलों में समर्पित कर दिया है, अब आप कृपा करके मुझ पर अपनी दया बरसाएँ।

प्रतिज्ञा तोहार ओइ, जो हि शरणागत, नाहि सो जानबो परमाद् सो हाम दुष्कृति, गति ना हेर-इ आन, आब् मागोँ तुवा परसाद्
अर्थ

आपकी यह प्रतिज्ञा है कि जो भी आपकी शरण लेता है, वह कभी माया से मोहित नहीं होता। मैं महापापी हूँ और आपके अतिरिक्त मुझे कोई और आश्रय दिखाई नहीं देता, इसलिए अब मैं आपकी कृपा की भीख माँगता हूँ।

आन मनो-रथ, निःशेष छोडतो, कब् हाम हौबुँ तोहारा नित्य-सेव्य तुहुँ, नित्य-सेवक मुइ, भकतिविनोद भाव सारा
अर्थ

कब मैं अपनी सारी अन्य इच्छाओं को पूर्णतः त्यागकर आपका हो जाऊँगा? आप ही मेरे नित्य स्वामी हैं और मैं आपका नित्य दास हूँ। यही भक्तिविनोद के हृदय का सार है।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
शरणागति
पद
4

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।