Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

प्रानेश्वर्! कोहोबुँ कि सरम कि बात्

(प्रानेश्वर्!) कोहोबुँ कि सरम कि बात् ऐछन पाप् नाहि, जो हाम ना कोरलुँ, सहस्र सहस्र बेरि नाथ्
अर्थ

हे प्राणेश्वर! मैं अपनी लज्जा की क्या बात कहूँ? हे नाथ! ऐसा कोई पाप नहीं जो मैंने हजारों-हजारों बार न किया हो।

सोहि करम-फल, भवे मोके पेश-इ, दोख देओबो आब् काहि तखोनक परिनाम्, कछु ना बिचारलुँ, आब् पछु तरैते चाहि
अर्थ

उन पापकर्मों के फल इस संसार में मुझ पर टूट पड़ते हैं। अब मैं किसे दोष दूँ? पहले मैंने परिणामों की चिंता नहीं की, पर अब मैं उनसे मुक्त होना चाहता हूँ।

दोख विचार-इ, तुँहु दन्ड देओबि, हाम भोग कोरबुँ संसार् करतो गतागति, भकत-जन-सङ्गे, मति रोहु चरणे तोहार्
अर्थ

मेरे पापों को तोलकर आप मुझे दंड देंगे, और मैं संसार का यह भोग सहूँगा। परन्तु जन्म-मृत्यु के इस चक्र में आते-जाते हुए भी, आपके भक्तों की संगति में मेरा चित्त आपके चरणों में ही लगा रहे।

आपन चतुर्पन, तुवा पदे सोँपलुँ, हृदोय-गरव दूरे गेलो दीन-दोया-मोय, तुवा कृपा निरमल, भकतिविनोद आशा भेलो
अर्थ

अपनी बुद्धि मैंने आपके चरणों में सौंप दी है, और मेरे हृदय का अभिमान दूर हो गया है। आप दीनों पर दया करने वाले हैं, और आपकी निर्मल कृपा ही भक्तिविनोद की आशा बन गई है।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
शरणागति
पद
4