- पद 1भजनहरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
“हरे कृष्ण” के परिणाम
57 भजन · 127 पद भजन के शब्दों में
सारे शब्दों वाले भजन। किसी एक शब्द वाले 505 और भजन दिखाएँ
1 पद भजन में
5
2 पद भजन में
3
4 पद भजन में
1 पद भजन में
- पद 1भजनकृष्ण गोबिन्द हरे
गोपी-बल्लभ शौरे
1 पद भजन में
- पद 1भजन(हरे) हरये नमः कृष्ण जादबाय नमः
जादबाय माधबाय केशबाय नमः
गोपाल गोबिन्द राम श्री-मधुसूदन
राधा-गोबिन्द बोलो (4 तिमेस्)
1 पद भजन में
- पद 5भजनएहेन गौराङ्ग-गुण न करिनु श्रबण
हय हय करि ह हुताश
हरे-कृष्ण महा-मन्त्र मुख भरि ना ल-इलाम
जीबन्-मृत गोबिन्द-दास
1 पद भजन में
- पद 8भजनहरिर् इति हरिर् इति जपति सकर्णम् (हरे कृष्ण हरे कृष्ण)
विरह-विहित-मरणेव निकामम्
1 पद भजन में
- पद 4भजनहरे कृष्ण हरे राम के शुनाबे आर
हरिदास छेपे गेल प्राण बाँचा भार
5 पद भजन में
13
- पद 1भजनकृष्णोत्कीर्तन-गान-नर्तन-परौ प्रेमामृताम्भो-निधी
धीराधीर-जन-प्रियौ प्रिय-करौ निर्मत्सरौ पूजितौ
श्री-चैतन्य-कृपा-भरौ भुवि भुवो भारावहन्तारकौ
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ - पद 2भजननाना-शास्त्र-विचारणैक-निपुणौ सद्-धर्म-संस्थापकौ
लोकानां हित-कारिणौ त्रि-भुवने मान्यौ शरण्याकरौ
राधा-कृष्ण-पदारविन्द-भजनानन्देन मत्तालिकौ
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
इस भजन में 3 और मिलान दिखाएँ
- पद 5भजनकूजत्-कोकिल-हंस-सारस-गणाकीर्णे मयूराकुले
नाना-रत्न-निबद्ध-मूल-विटप-श्री-युक्त-वृन्दावने
राधा-कृष्णम् अहर्-निशं प्रभजतौ जीवार्थदौ यौ मुदा
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ - पद 6भजनसङ्ख्या-पूर्वक-नाम-गान-नतिभिः कालावसानी-कृतौ
निद्राहार-विहारकादि-विजितौ चात्यन्त-दीनौ च यौ
राधा-कृष्ण-गुण-स्मृतेर् मधुरिमानन्देन सम्मोहितौ
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ - पद 7भजनराधा-कुण्ड-तटे कलिन्द-तनया-तीरे च वंशीवटे
प्रेमोन्माद-वशाद् अशेष-दशया ग्रस्तौ प्रमत्तौ सदा
गायन्तौ च कदा हरेर् गुण-वरं भावाभिभूतौ मुदा
वन्दे रूप-सनातनौ रघु-युगौ श्री-जीव-गोपालकौ
6 पद भजन में
- पद 1भजनकृष्ण-नाम धरे कोतो बल्
विषय-वासनानले, मोर चित्त सदा ज्वले,
रवि-तप्त मरु-भूमि-सम्
कर्न-रन्ध्र-पथ दिया, हृदि माझे प्रवेशिया, … - पद 4भजनकोरि' एतो उपद्रव, चित्ते वर्षे सुधा-द्रव,
मोरे डारे प्रेमेर सागरे
किछु ना बुझिते दिलो, मोरे तो’ बातुल कोइलो,
मोर चित्त-वित्त सब हरे
इस भजन में 4 और मिलान दिखाएँ
- पद 5भजनलोइनु आश्रोय जा’र्, हेनो व्यवहार ता’र्,
वर्निते ना पारि ए सकल्
कृष्ण-नाम इच्छा-मोय्, जाहे जाहे सुखी होय्,
सेइ मोर सुखेर सम्बल् - पद 6भजनप्रेमेर कलिका नाम्, अद्भुत रसेर धाम्,
हेनो बल करये प्रकाश्
ईषत् विकशि’ पुनः, देखाय् निज-रूप-गुन,
चित्त हरि’ लोय कृष्ण-पाश् - पद 7भजनपूर्न विकशित होइया, ब्रजे मोरे जाय लोइया,
देखाय् मोरे स्वरूप-विलास्
मोरे सिद्ध-देह दिया, कृष्ण-पाशे राखे गिया,
ए देहेर कोरे सर्व-नाश् - पद 8भजनकृष्ण-नाम-चिन्तामणि, अखिल रसेर खनि,
नित्य-मुक्त शुद्ध-रस-मोय्
नामेर बालाइ जत, सब लो’ये होइ हत,
तबे मोर सुखेर उदोय्
1 पद भजन में
- पद 1भजनजय जशोदा-नन्दन कृष्ण गोपाल गोबिन्द
जय मदन-मोहन हरे अनन्त मुकुन्द
1 पद भजन में
- पद 8भजनमाथुरं विकुण्ठतो ‘पि जन्म-धाम दुर्लभं
वासकाननं ततो ऽपि पाणिना धृतो गिरिः
श्री-हरेस् ततो ऽपि यत् परं सरो ऽति-पावनं
तत्र कृष्ण-कुण्ड एव संस्थितिः स्तुतास्तु नः
1 पद भजन में
- पद 20भजन. सर्वेश्वर जगत्-पाल
भगवन् हरे ईश्वर
मुरारे कृष्ण कंसारिन्
हतारि-गति-दायक
1 पद भजन में
- पद 1भजनजय यशोदा-नन्दन कृष्ण गोपाल गोविन्द
जय मदन-मोहन हरे अनन्त मुकुन्द
12 पद भजन में
9
- पद 1भजनप्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं
विहित-वहित्र-चरित्रम् अखेदम्
केशव धृत-मीन-शरीर जय जगदीश हरे - पद 2भजनक्षितिर् इह विपुलतरे तिष्ठति तव पृष्ठे
धरणि-धरण-किण-चक्र-गरिष्ठे
केशव धृत-कूर्म-शरीर जय जगदीश हरे
इस भजन में 10 और मिलान दिखाएँ
- पद 3भजनवसति दशन-शिखरे धरणी तव लग्ना
शशिनि कलङ्क-कलेव निमग्ना
केशव धृत-शूकर-रूप जय जगदीश हरे - पद 4भजनतव कर-कमल-वरे नखम् अद्भुत-शृङ्गं
दलित-हिरण्यकशिपु-तनु-भृङ्गम्
केशव धृत-नरहरि-रूप जय जगदीश हरे - पद 5भजनछलयसि विक्रमणे बलिम् अद्भुत-वामन
पद-नख-नीर-जनित-जन-पावन
केशव धृत-वामन-रूप जय जगदीश हरे - पद 6भजनक्षत्रिय-रुधिर-मये जगद्-अपगत-पापम्
स्नपयसि पयसि शमित-भव-तापम्
केशव धृत-भृगुपति-रूप जय जगदिश हरे - पद 7भजनवितरसि दिक्षु रणे दिक्-पति-कमनीयं
दश-मुख-मौलि-बलिम् रमणीयम्
केशव धृत-राम-शरीर जय जगदिश हरे - पद 8भजनवहसि वपुषि विशदे वसनं जलदाभं
हल-हति-भीति-मिलित-यमुनाभम्
केशव धृत-हलधर-रूप जय जगदिश हरे - पद 9भजननिन्दासी यज्ञ-विधेर् अहह श्रुति-जातं
सदय-हृदय दर्शित-पशु-घातम्
केशव धृत-बुद्ध-शरीर जय जगदीश हरे - पद 10भजनम्लेच्छ-निवह-निधने कलयसि करवालं
धूमकेतुम् इव किम् अपि करालम्
केशव धृत-कल्कि-शरीर जय जगदीश हरे - पद 11भजनश्री-जयेदेव-कवेर् इदम् उदितम् उदारं
शृणु सुख-दं शुभ-दं भव-सारम्
केशव धृत-दश-विध-रूप जय जगदीश हरे - पद 12भजनवेदान् उद्धरते जगन्ति वहते भू-गोलम् उद्बिभ्रते
दैत्यं दारयते बलिं छलयते क्षत्र-क्षयं कुर्वते
पौलस्त्यं जयते हलं कलयते कारुण्यम् आतन्वते
म्लेच्छान् मूर्छयते दशकृति-कृते कृष्णाय तुभ्यं नमः
1 पद भजन में
14
- पद 1भजनगाय् गोरा मधुर् स्वरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
1 पद भजन में
13
- पद 4भजनश्री-राधार् भावे एबे गोरा अवतार्
हरे कृष्ण नाम् गौर करिल प्रचार्
ए-बार् प्रचार् जेइ करिल हरे कृष्ण महा-मन्त्र
प्रचार् जेइ करिल हरे कृष्ण महा-मन्त्र …
1 पद भजन में
3
- पद 1भजनहरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
1 पद भजन में
3
- पद 2भजनहरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
12 पद भजन में
- पद 1भजनप्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं विहित-वहित्र-चरित्रम् अखेदम्
केशव धृत-मीन-शरीर जय जगदीश हरे - पद 2भजनक्षितिर् इह विपुलतरे तिष्ठति तव पृष्ठे
धरणि-धरण-किण-चक्र-गरिष्ठे
केशव धृत-कूर्म-शरीर जय जगदीश हरे
इस भजन में 10 और मिलान दिखाएँ
- पद 3भजनवसति दशन-शिखरे धरणी तव लग्ना
शशिनि कलङ्क-कलेव निमग्ना
केशव धृत-शूकर-रूप जय जगदीश हरे - पद 4भजनतव कर-कमल-वरे नखम् अद्भुत-शृङ्गं
दलित-हिरण्यकशिपु-तनु-भृङ्गम्
केशव धृत-नरहरि-रूप जय जगदीश हरे - पद 5भजनछलयसि विक्रमणे बलिम् अद्भुत-वामन
पद-नख-नीर-जनित-जन-पावन
केशव धृत-वामन-रूप जय जगदीश हरे - पद 6भजनक्षत्रिय-रुधिर-मये जगद्-अपगत-पापं
स्नपयसि पयसि शमित-भव-तापम्
केशव धृत-भृगुपति-रूप जय जगदीश हरे - पद 7भजनवितरसि दिक्षु रणे दिक्-पति-कमनीयं
दश-मुख-मौलि-बलिं रमणीयम्
केशव धृत-राम-शरीर जय जगदीश हरे - पद 8भजनवहसि वपुषि विशदे वसनं जलदाभं
हल-हति-भीति-मिलित-यमुनाभम्
केशव धृत-हलधर-रूप जय जगदीश हरे - पद 9भजननिन्दसि यज्ञ-विधेर् अहह श्रुति-जातं
सदय-हृदय दर्शित-पशु-घातम्
केशव धृत-बुद्ध-शरीर जय जगदीश हरे - पद 10भजनम्लेच्छ-निवह-निधने कलयसि करवालं
धूमकेतुम् इव किम् अपि करालम्
केशव धृत-कल्कि-शरीर जय जगदीश हरे - पद 11भजनश्री-जयदेव-कवेर् इदम् उदितम् उदारं
शृणु सुख-दं शुभ-दं भव-सारम्
केशव धृत-दश-विध-रूप जय जगदीश हरे - पद 12भजनवेदान् उद्धरते जगन्ति वहते भू-गोलम् उद्बिभ्रते
दैत्यं दारयते बलिं छलयते क्षत्र-क्षयं कुर्वते
पौलस्त्यं जयते हलं कलयते कारुण्यम् आतन्वते
म्लेच्छान् मूर्छयते दशाकृति-कृते कृष्णाय तुभ्यं नमः