Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

विषय विमूढ आर् मायावादी जन्

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विषय-विमूढ आर् मायावादी जन् भक्ति-शून्य दुँहे प्रान धरे अकारण्
अर्थ

विषय में मोहित मनुष्य और मायावादी, दोनों ही भक्ति से रहित होकर व्यर्थ अपना जीवन बिताते हैं।

एइ दुइ-सङ्ग नाथ! ना होय् आमार् प्रार्थना कोरिये आमि चरणे तोमार्
अर्थ

हे नाथ! आपके चरणों में मैं यही प्रार्थना करता हूँ कि इन दोनों प्रकार के अपराधियों की संगति मुझे कभी न मिले।

से दुवेर मध्ये विषयी तबु भालो मायावादी-सङ्ग नाहि मागि कोनो कालो
अर्थ

इन दोनों में विषयी लोग फिर भी कुछ ठीक हैं। मायावादियों की संगति मैं कभी नहीं चाहता।

विषयी-हृदोय जबे साधु-सङ्ग पाय् अनायासे लभे भक्ति भक्तेर कृपाय्
अर्थ

जब विषयी मनुष्यों का हृदय साधुओं की संगति पाता है, तो उन भक्तों की कृपा से वे सहज ही भक्ति प्राप्त कर लेते हैं।

मायावाद-दोष जा’र हृदोये पशिलो कुतर्के हृदोय ता’र वज्र-सम भेलो
अर्थ

परन्तु जिस किसी के हृदय में मायावाद का दोष प्रवेश कर जाता है, कुतर्क के प्रभाव से उसका हृदय वज्र के समान कठोर हो जाता है।

भक्तिर स्वरूप, आर `विषय’, `आश्रोय्’ मायावादी `अनित्य’ बोलिया सब कोय्
अर्थ

मायावादी कहते हैं कि भगवान, उनके भक्त और भक्ति, ये सब अनित्य हैं, और इसलिए मिथ्या हैं।

धिक् ता’र कृष्ण-सेवा-श्रवन-कीर्तन् कृष्ण-अङ्गे वज्र हाने ताहार स्तवन्
अर्थ

उनकी कृष्ण-सेवा, श्रवण और कीर्तन के दिखावे पर धिक्कार है! उनकी स्तुतियाँ कृष्ण के दिव्य शरीर पर वज्र बनकर गिरती हैं।

मायावाद सम भक्ति-प्रतिकूल नाइ अतएव मायावादी-सङ्ग नाहि चाइ
अर्थ

भक्ति के लिए मायावाद जैसा प्रतिकूल और कुछ नहीं है। इसलिए मैं मायावादियों की संगति कभी नहीं चाहता।

भकतिविनोद मायावाद दूर कोरि वैष्णव-सङ्गेते बैसे नामाश्रय धोरि’
अर्थ

मायावाद को दूर रखते हुए भक्तिविनोद वैष्णवों की संगति में रहता है और नाम की शरण लेता है।