Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

`अहं मम’ शब्द अर्थे जाहा किछु होय्

`अहं मम’-शब्द-अर्थे जाहा किछु होय् अर्पिलुँ तोमार पदे, ओहे दोया-मोय्!
अर्थ

हे दयामय प्रभु! 'मैं' और 'मेरा' इन शब्दों का जो भी अर्थ होता है, वह सब मैंने आपके चरणों में समर्पित कर दिया है।

`आमार’ आमि तो’ नाथ! ना रोहिनु आर् एखोन होइनु आमि केवल तोमार्
अर्थ

हे नाथ! अब मैं 'अपना' नहीं रहा। अब मैं पूर्णतः आपका ही हो गया हूँ।

`आमि’ शब्दे देही जीव अहंता छाडिलो त्वदीयाभिमान आजि हृदोये पशिलो
अर्थ

मैंने समझ लिया है कि 'मैं' शब्द का अर्थ है वह जीव जो इस शरीर में स्थित रहकर उसे चेतना देता है, इसलिए मैंने मिथ्या अहंकार को त्याग दिया है। आज मेरे हृदय में 'आपका अपना' होने का अभिमान प्रवेश कर गया है।

आमार् सर्वस्व—देहो, गेहो अनुचर् भाइ, बन्धु, दारा, सुत, द्रव्य, द्वार, घर्
अर्थ

मेरी सारी संपत्ति यही है: यह शरीर, घर, सेवक, भाई, मित्र और सम्बन्धी, पत्नी, संतान, धन-सामान, द्वार और भवन।

से सब होइलो तव, आमि होइनु दास् तोमार गृहेते एबे आमि कोरि बास्
अर्थ

वह सब कुछ अब आपका हो गया है, और मैं आपका सेवक बन गया हूँ। अब मैं आपके ही घर में निवास करता हूँ।

तुमि गृह-स्वामी, आमि सेवक तोमार् तोमार सुखेते चेष्टा एखोन आमार्
अर्थ

इस घर के स्वामी आप हैं, और मैं आपका सेवक हूँ। अब मेरे सारे प्रयास केवल आपकी प्रसन्नता के लिए हैं।

स्थूल-लिङ्ग-देहे मोर सुकृत दुष्कृत आर मोर नहे, प्रभु! आमि तो’ निष्कृत
अर्थ

मेरे स्थूल और सूक्ष्म शरीर से जो भी पुण्य या पाप कर्म होते हैं, वे अब मेरे नहीं रहे, हे प्रभु! मैं तो मुक्त हूँ।

तोमार इच्छाय मोर इच्छा मिशाइलो भकतिविनोद आज आपने भुलिलो
अर्थ

मेरी इच्छा आपकी इच्छा में मिल गई है। आज भक्तिविनोद स्वयं को भूल गया है।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
शरणागति
पद
8