शचीर आङ्गिनाय नाचे
शचीर आङ्गिनाय नाचे विश्वम्भर राय
इस्कॉन भक्त (1) की 116 रिकॉर्डिंग। ऑडियो इस्कॉन डिज़ायर ट्री के सौजन्य से चलता है।
116 भजन · पृष्ठ 3 / 3
शचीर आङ्गिनाय नाचे विश्वम्भर राय
शुद्ध-भकत-चरण-रेणु,
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु जीवे दोया कोरि’
श्री नन्द-नन्दनाष्टक
श्री-राधा-कृष्ण-पद-कमले मन
श्री-रूप पश्चाते आमि रहिब भीत हञा
श्री-रूप-मञ्जरी-पद, सेइ मोर सम्पद,
श्री हरि-नामाष्टक
सखे कलय गौरम् उदारम्
भजिबो तोमाइ मोर् मन छाइ
हरि बोलो हरि बोलो हरि बोलो भाइ रे
हरि हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिन
हरि हरि! बिफले जनम गोँआइनु
हरि हरि! कबे मोर हैबे सुदिने
हरि हरि! कि मोर करम अभाग
हरि हरि! बड शेल मरमे रहिल
हरि हे दोयाल् मोर् जय राधा-नाथ्
हा हा ! प्रभु लोकनाथ राख पाद-द्वन्द्वे
हा हा प्रभु ! कर दया करुणा तोमार