जय राधा माधव
(जय) राधा-माधव (जय) कुञ्ज-बिहारी
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(जय) राधा-माधव (जय) कुञ्ज-बिहारी
जय शची-सुत गौर-हरि
गोप्य ऊचुः
जीव् जागो, जीव् जागो, गौरचान्द बोले
जे आनिलो प्रेम-धन कोरुणा प्रचुर्
ठाकुर वैष्णव-गण करि एइ निबेदन
ठाकुर वैष्णव-पद अवनीर सु-सम्पद
तुमि तो’ मारिबे जारे, के तारे राखिते पारे,
तुमि सर्वेश्वरेश्वर, ब्रजेन्द्र-कुमार!
प्रसिद बाल-गोपाल
दुर्लभ मानब-जन्म लभिया सोंसारे
दुष्ट मन! तुमि किसेर् वैष्णव?
धन मोर नित्यानन्द पति मोर गौरचन्द्र
नदीया-नगरे गोरा-चरित अमृत
नव-नीरद-निन्दित-कान्ति-धरं
नाचे गोरा प्रेमे भोरा
नारद मुनि, बाजाय् वीणा
हरि हे
निताइ कि नाम एनेछे रे
निताइ गुण-मणि आमार् निताइ गुण-मणि
निताइ-पद-कमल, कोटि-चन्द्र-सुशीतल
निवेदन कोरि प्रभु! तोमार चरणे
परम कोरुण, पहू दुइ जन
प्रभु तब पद-जुगे मोर निबेदन
प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं
प्राणेश्वर! निवेदन एइ जन करे
बिश्वे उदित नाम-तपन
बोलो हरि बोलो (3 तिमेस्)
भज रे भज रे आमार मन अति मन्द
भजहू रे मन श्री-नन्द-नन्दन
भुलिया तोमारे, संसारे आसिया,
मदन-मोहन तनु गौराङ्ग सुन्दर
मन रे! कह ना गौर कथा
मम मन मन्दिरे रहो निशि-दिन्
मानस, देहो, गेहो, जो किछु मोर्
मोर प्रभु मदन गोपाल
यदि गौर ना होइतो, तबे कि होइतो,
रमणी-शिरोमणि बृषभानु-नन्दिनी
राढ देशे नाम एकचक्र ग्राम
राधा-कुन्ड-तट-कुञ्ज-कुटीर्
राधा-कृष्ण-सेवोन् मुञि जीवने मरणे
राधा-कृष्ण! निवेदन एइ जन करे
राधे जय जय माधव-दयिते
रूपेर गौरब केनो भाइ
लोकनाथ प्रभु ! तुमि दया कर मोरे
विद्यार विलासे, काटाइनु काल,
वृन्दावन रम्य-स्थान दिव्य-चिँतामणि-धाम
व्रजे प्रसिद्धं नवनीत-चौरं