1 पद अर्थ में
- पद 4अर्थहे भाई, अगुरु और चन्दन न हो तो मिट्टी का तिलक लगा ले। हार के बदले तुलसी-माला पहन। इस तरह कामनाओं के फंदे और सुख-भोग के बुरे विलास को घटा, और संसार की आग से छूट जा।
23 भजन · 22 पद भजन के शब्दों में · 11 पद अर्थ में