Vaishnava Songs
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“तुलसी” के परिणाम

23 भजन · 22 पद भजन के शब्दों में · 11 पद अर्थ में

3 पद भजन में 6

कृष्ण दास · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    नमो नमः तुलसी कृष्ण-प्रेयसि नमो नमः
    राधा-कृष्ण-सेवा पाबो एइ अबिलाषी
  • पद 6भजन
    श्री तुलसी प्रदक्षिण मन्त्र
    यानि कानि च पापानि
    ब्रह्म-हत्यादिकानि च
    तानि तानि प्रणश्यन्ति …
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 7भजन
    श्री तुलसी प्रणाम
    वृन्दायै तुलसी-देव्यै
    प्रियायै केशवस्य च
    विष्णु-भक्ति-प्रदे देवि …
1 पद भजन में 1 पद अर्थ में 7

भक्तिविनोद ठाकुर · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 7भजन
    तुलसी देखि', जुराय प्राण,
    माधव-तोषणी जानि'
    गौर-प्रिय, शाक-सेवने,
    जीवन सार्थक मानि
  • पद 7अर्थ
    तुलसी के दर्शन से मेरे प्राण शांत हो जाते हैं, क्योंकि मैं जानता हूँ कि वे माधव को प्रिय हैं। और गौर को प्रिय शाक का सेवन करके मैं अपने जीवन को सफल मानता हूँ।
2 पद भजन में 2 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · शरणागति

  • पद 3भजन
    गौर-भकत-प्रिय-वेश दधाना
    तिलक-तुलसी-माला-शोभमाना
  • पद 7भजन
    मञ्चे बसाओबुँ तुलसी-महाराणी
    कीर्तन-सज्ज तँहि राखबो आनि’
  • पद 3अर्थ
    गौरांग के भक्तों को प्रिय वेश धारण करके, मैं तिलक और तुलसी की माला से सुशोभित रहूँगा।
  • पद 7अर्थ
    एक वेदी पर मैं तुलसी महारानी को स्थापित करूँगा, और वहाँ कीर्तन के लिए वाद्य-यंत्र भी रखूँगा।
1 पद भजन में 4

कुलशेखर आलवार · और भजन

  • पद 20भजन
    जिह्वे कीर्तय केशवं मुर-रिपुं चेतो भज श्रीधरं
    पाणि-द्वन्द्व समर्चयाच्युत-कथाः श्रोत्र-द्वय त्वं शृणु
    कृष्णं लोकय लोचन-द्वय हरेर् गच्छाङ्घ्रि-युग्मालयं
    जिघ्र घ्राण मुकुन्द-पाद-तुलसीं मूर्धन् नमाधोक्षजम्
1 पद भजन में 1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · शरणागति

  • पद 3भजन
    कुसुमे गाँथोबुँ हार्
    तुलसी-मणि-मञ्जरी तार्
  • पद 3अर्थ
    मैं फूलों की माला गूँथूँगी, जिनके बीच तुलसी की मंजरियाँ रत्नों जैसी सजी होंगी।
1 पद भजन में 1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · शरणागति

  • पद 4भजन
    तोमार प्रसादे देहो कोरिबो पोषन्
    नैवेद्य-तुलसी-घ्रान कोरिबो ग्रहम्
  • पद 4अर्थ
    आपके प्रसाद से ही मैं अपने शरीर का पोषण करूँगा। आपको चढ़ाई गई तुलसी की पत्तियों और मंजरियों की सुगंध का आनंद लूँगा।
1 पद भजन में 1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर · गीतमाला

  • पद 4भजन
    तुलसी भजन चीन भक्त जन-दरशन
    एइ-रूप नाना उद्दीपन
    भक्ति-रस-आस्वादने एइ सब हेतु-गणे
    निर्देशिल रूप-सनातन
  • पद 4अर्थ
    तुलसी, भक्ति के चिह्न, और भक्तों का दर्शन भी उद्दीपनों में सम्मिलित हैं, जो भक्ति-रस के अमृत का आस्वादन कराते हैं। यह सब श्रील रूप गोस्वामी और श्रील सनातन गोस्वामी द्वारा सिखाया गया है।
1 पद भजन में 1 पद अर्थ में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 2भजन
    हुङ्कार करि तुलसी देय बारे बारे
    नबद्वीपे गौर आनि तारिल संसारे
  • पद 2अर्थ
    वे बार-बार तुलसी अर्पित करते रहे। बार-बार वे गरज कर पुकारते रहे। इस प्रकार अद्वैत आचार्य भगवान गौर को नवद्वीप में ले आए। इस प्रकार उन्होंने सबको जन्म-मृत्यु के संसार से तार दिया।
1 पद भजन में 1 पद अर्थ में

भक्तिविनोद ठाकुर

  • पद 1भजन
    …वृन्दावन-राधा-कुण्ड-यमुनाजी की जय!
    श्री तुलसी-देवी की जय!
    श्री गङ्गाजी की जय!
    श्री सुरभि-कुञ्ज की जय! …
  • पद 1अर्थ
    …जय! श्री राधा-कृष्ण, गोप-गोपी, गौ, गोवर्धन, वृन्दावन, राधा-कुण्ड और यमुनाजी की जय! श्री तुलसी देवी की जय! श्री गंगाजी की जय! श्री सुरभि-कुंज की जय! श्री नामहट्ट की जय! श्री भक्ति देवी की जय! श्री गायक, श्रोता और भक्तवृन्द की जय!…
1 पद भजन में

गोविन्द घोष · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 4भजन
    स-चन्दन तुलसी-पत्र गोरार चरणे दिया
    आचार्य कृष्णाय नमः बले
    कहे ए गोबिन्द घोष हरि-ध्वनि घन घन
    करिते लागिल कुतूहले