निताइ पद कमल
निताइ-पद-कमल, कोटि-चन्द्र-सुशीतल
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निताइ-पद-कमल, कोटि-चन्द्र-सुशीतल
परम कोरुण, पहू दुइ जन
प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं
भजहू रे मन श्री-नन्द-नन्दन
मम मन मन्दिरे रहो निशि-दिन्
यशोमती-नन्दन, ब्रज-बरो-नागर,
राधा-कुन्ड-तट-कुञ्ज-कुटीर्
राधा-कृष्ण प्राण मोर जुगल-किशोर
राधे जय जय माधव-दयिते
विभावरी शेष, आलोक-प्रवेश,
वृन्दावन रम्य-स्थान दिव्य-चिँतामणि-धाम
वृन्दावन-वासी जत वैष्णवेर गण
शुद्ध-भकत-चरण-रेणु,
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु दोया कोरो मोरे
श्री-गुरु-चरण-पद्म, केवल-भकति-सद्म,
श्री-रूप-मञ्जरी-पद, सेइ मोर सम्पद,
सर्वस्व तोमार्, चरणे संपिया,
संसार-दावानल-लीढ-लोक
सुन्दर-बाला शची-दुलाला
हरि बोलो हरि बोलो हरि बोलो भाइ रे
हे गोविन्द हे गोपाल