'गौराङ्ग' बोलिते हबे
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
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69 भजन · पृष्ठ 1 / 2
'गौराङ्ग' बोलिते हबे पुलक-शरीर
'राधा-कृष्ण' बोल् बोल् बोलो रे सोबाइ
अक्रोध परमानन्द नित्यानन्द राय्
अधरं मधुरं वदनं मधुरं
अनादि' करम-फले, पडि' भवार्णर जले,
अवतार-सार, गोरा-अवतार, केन ना भजिलि ता'रे
आमार जीवन, सदा पापे रत,
आमार निताइ मिले ना भोला मन
(आमि) जमुना-पुलिने, कदम्ब-कानने,
आर केनो माया-जाले पर्डितेछो जीब-मीन
आसलो कथा बोल्ते कि
उदिलो अरुण पूरब-भागे,
ओहे!
कदाचित् कालिन्दी-तट-विपिन-सङ्गीतक-रवो
कबे गौर-बने, सुरधुनी-तटे,
कबे ह'बे बोलो से-दिन आमार्
कलि-कुक्कुर्-कदन् जदि चाओ (हे)
कुङ्कुमाक्त-काञ्चनाब्ज-गर्व-हारि-गौरभा
यद् अपि समाधिषु विधिर् अपि पश्यति
कृष्ण होइते चतुर्-मुख, होय् कृष्ण-सेवोन्मुख,
कृष्णोत्कीर्तन-गान-नर्तन-परौ प्रेमामृताम्भो-निधी
पखि ना जानि कोन् अपराधे
गाङ्गेय-चाम्पेय-तडिद्-विनिन्दि
गाय् गोरा मधुर् स्वरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
गुरुदेव्!
गोपीनाथ मम निबेदन शुनो
गौरा पहु ना भजिया गोइनु
गौराङ्ग तुमि मोरे दया ना छाडिह
चेतो-दर्पण-मार्जनं भव-महा-दावाग्नि-निर्वापणं
(किब) जय जय गोराचान्देर् आरतिको शोभा
जय जय जगन्नाथ शचीर नन्दन्
जय जय राधा कृष्ण जुगल-मिलन
जय राधा-माधव राधा-माधव राधे
जय राधे, जय कृष्ण, जय वृन्दावन्
गोप्य ऊचुः
जीव् जागो, जीव् जागो, गौरचान्द बोले
जे आनिलो प्रेम-धन कोरुणा प्रचुर्
तुमि सर्वेश्वरेश्वर, ब्रजेन्द्र-कुमार!
दोयाल् निताइ चैतन्य बोले नाच रे आमार मन
धन मोर नित्यानन्द पति मोर गौरचन्द्र
धुले धुले गोरा चाँद
नदीया-गोद्रुमे नित्यानन्द महाजन
नमस् ते नरसिंहाय
नमो नमः तुलसी कृष्ण-प्रेयसि नमो नमः
नव गौर-वरं नव-पुष्प-शरं
नारद मुनि, बाजाय् वीणा
निताइ गुण-मणि आमार् निताइ गुण-मणि