दण्डवत् 82
जय धन-पति-ध्यात
सनातन गोस्वामी इस संग्रह के 121 भजनों के रचयिता हैं, जो इन ग्रन्थों से लिए गए हैं: कृष्ण-लीला-स्तव। 3 रिकॉर्डिंग सुनी जा सकती हैं।
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जय धन-पति-ध्यात
अक्रूर-वर्णिताषेष
जयाक्रूर-रथारूढ
स्वाफल्कि-सण्चालित-यान-वहं
यमुना-मज्जिताक्रूर
मथुरोपवन-प्राप्त
मथुरा-जन-सम्वीक्ष्य
प्रसीद हे सुदामाख्य
सीता-पते दासाराथे रघुद्वह
सहस-नर्म-सम्प्रष्ना
नानोपयन-ताम्बूल
कंस-कारित-मण्चौघ
रण्ग-प्रवेष-सुभग
चाणूर-भाषिफं वन्दे
सहज-प्रेम-मृदुल
कंस-योषित्-समाष्वासिन्न्
ईष-ज्णान-कृताष्लेष
सद्-वाक्यानन्दित-ष्रीमद्
नमस् ते स्वीय-दुःख-घ्न सर्प-क्रीडा-विशारद
प्रसीद भर्तृ-संरुद्ध गोपी-प्रेमाग्नि-वर्धन
प्रातर्-भोजन-संयुक्त वत्स-व्रात-पुरःसर
एतल् लीला-स्तवं नाम
राधिका शरद-इन्दू-निन्दि मूख-मण्डली
विधि-वाक्यामृताब्धीन्दुर् गोप-बालक-वेश हे
श्री-कृष्णस्य कथा-सूत्रं