दण्डवत् 39
विधि-वाक्यामृताब्धीन्दुर्
सनातन गोस्वामी इस संग्रह के 121 भजनों के रचयिता हैं, जो इन ग्रन्थों से लिए गए हैं: कृष्ण-लीला-स्तव। 3 रिकॉर्डिंग सुनी जा सकती हैं।
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विधि-वाक्यामृताब्धीन्दुर्
परमेष्वर लक्ष्मीसा
धन्य-धन्य-व्रज-वधू
ब्रह्म-प्रसाद-सुमुख
पौगण्डागम गोपाल
जय ष्रीदाम-सुबल
गोपी-सौभाग्य-संभाव्यं
यमुना-तट-सण्चरिन्
तुण्ग-नीप-समारुढम्
नमस् ते स्वीय-दुःक-घ्न
नाग-पत्नी-स्तुति-प्रीत
स्व-बल्य्-अषन-कालिय
सर्वावतार-बीजाय
मृगादि-चेष्ट-क्रीडा-कृद्
जय मुण्जाटवी-भ्रष्ट
प्रावृत्-ष्री-भुषीताराण्य
षरद्-विहार-मधुर
चक्षुः-सफलय-सम्पादि
गोप-कन्या-व्रत-प्रीत
ष्री-वृन्दावन-दूरस्थ
यज्ण-पत्नी-प्रसदार्थ
जय वासव-याग-ज्ण
जनितेन्द्र-रुसं षक्र
ष्री-चतुः-सन-रूपाय
जयाद्भुत-महा-चेष्टा
भीत-लज्जित-देवेस
प्रसीदमे पयो-मग्न
जय जय निज-पादा
प्रसीद भर्तृ-संरूद्ध
गोपिका-नयनास्वाद्य
जय गोपी-गणान्विष्ट
राधाराधित राधेष
पुनः पुलिन-सम्प्राप्त
अत्य्-उच्च-गोपिका-दुःख
अष्टमे सार्वभौमस् त्वम्
विदग्ध-गोपिकागाध
गोपी-विरह-सन्ताप
जल-क्रीदाति-कुषल
परीक्षित्-पृष्ट-रासार्थ
जयाम्बिक-वन-प्राप्त
काम-पाल-सह-क्रीड
अहर्-विरह-सन्तप्त
अरिष्ट-त्रासिताषेष
नारद-ज्णापितोदन्त
जय गोकुल-सन्त्रासि
प्रह्लाद-संह्लादक भक्त-वत्सल
जय भागवत-ष्रेष्ठ
हे मेषायित-गोपाल