मधुरेर स्थायी भाब लभे जते अबिर्भाब
मधुरेर स्थायी भाब लभे जते अबिर्भाब
गीतमाला में 81 भजन हैं, जिनके रचयिता भक्तिविनोद ठाकुर हैं, जो 5 अध्यायों में सजे हैं।
81 भजन · पृष्ठ 2 / 2
मधुरेर स्थायी भाब लभे जते अबिर्भाब
रति प्रेम स्नेह मान प्रणय ओ रागाख्यान
रत्य्-आस्वाद हेतु जत बिभाब नामेते ख्यात
श्री-नन्दानन्दन धन तदीय बल्लभा-गण
सु-रम्य मधुर-स्मित सर्ब-सल्-लखणान्वित
सु-रम्यादि गुण-गण होइयाछे बिभूषण
श्री-कृष्णे सेबिबो बोलि' गृह छाडि' कुञ्जे चोलि'
नायिकार शिरोमणि ब्रजे राधा ठाकुराणी
राधा-कृष्ण-गुण-गान मिथासक्ति सम्बर्धन
पञ्च-सखी मध्ये चार नित्य-सिद्ध राधिकार
परम चैतन्य हरि ताँर शक्ति बनेश्वरी
कृष्ण कृष्ण-भक्त-गण गुण नाम सु-चरित
बिभाबित रति जबे क्रियापर हो'ये तबे
स्थायी भाबाबिष्ट चित्त पाइया बिभाब-बित्त
निर्बेद बिषाद मद दैन्य ग्लानि श्रमोन्माद
साधारणि समञ्जसा स्थायी लाभे भाब दशा
श्री उज्ज्वल रस सार स्वभाबतः द्वि-प्रकार
दर्शन आश्लेषन्वित आनुकूल्य सेबाश्रीत
सन्दर्शन संस्पर्शन जल्प बर्त्म-निरोधन
रस-तत्त्व नित्य जैछे ब्रज-तत्त्व नित्य तैछे
कृष्णेर जतेक खेला तार मध्ये नर-लीला