दण्डवत् 64
प्रसीद भर्तृ-संरूद्ध
कृष्ण-लीला-स्तव में 104 भजन हैं, जिनके रचयिता सनातन गोस्वामी हैं, जो 53 अध्यायों में सजे हैं।
104 भजन · पृष्ठ 2 / 2
प्रसीद भर्तृ-संरूद्ध
गोपिका-नयनास्वाद्य
जय गोपी-गणान्विष्ट
राधाराधित राधेष
पुनः पुलिन-सम्प्राप्त
अत्य्-उच्च-गोपिका-दुःख
विदग्ध-गोपिकागाध
गोपी-विरह-सन्ताप
जल-क्रीदाति-कुषल
परीक्षित्-पृष्ट-रासार्थ
जयाम्बिक-वन-प्राप्त
काम-पाल-सह-क्रीड
अहर्-विरह-सन्तप्त
अरिष्ट-त्रासिताषेष
नारद-ज्णापितोदन्त
जय गोकुल-सन्त्रासि
जय भागवत-ष्रेष्ठ
हे मेषायित-गोपाल
जय धन-पति-ध्यात
अक्रूर-वर्णिताषेष
जयाक्रूर-रथारूढ
स्वाफल्कि-सण्चालित-यान-वहं
यमुना-मज्जिताक्रूर
मथुरोपवन-प्राप्त
मथुरा-जन-सम्वीक्ष्य
प्रसीद हे सुदामाख्य
सहस-नर्म-सम्प्रष्ना
नानोपयन-ताम्बूल
कंस-कारित-मण्चौघ
रण्ग-प्रवेष-सुभग
चाणूर-भाषिफं वन्दे
सहज-प्रेम-मृदुल
कंस-योषित्-समाष्वासिन्न्
ईष-ज्णान-कृताष्लेष
सद्-वाक्यानन्दित-ष्रीमद्
आनीत-कंस-सन्त्रास
जय ष्री-मथुरा-नाथ
अद्य-ष्वो-गमन-व्याज
ष्री-जगन्नाथ नीलाद्रि
ष्रिमच्-चैतन्यदेव त्वां
नमो ब्राह्मण-रूपाय
पषाण-धातु-मृद्-दारु-- सिकता-मणि-लेख-ज
सर्व-षस्त्राब्धि-पीयुष
ष्री-कृष्ण तव कारुण्य
एतल् लीला-स्तवं नाम