'राधा कृष्ण' बोल् बोल्
'राधा-कृष्ण' बोल् बोल् बोलो रे सोबाइ
श्रीमान स्वरूप दामोदर प्रभु की 34 रिकॉर्डिंग। ऑडियो इस्कॉन डिज़ायर ट्री के सौजन्य से चलता है।
34 भजन
'राधा-कृष्ण' बोल् बोल् बोलो रे सोबाइ
अधरं मधुरं वदनं मधुरं
आमार जीवन, सदा पापे रत,
आर केनो माया-जाले पर्डितेछो जीब-मीन
ईश्वरः परमः कृष्णः
एखोन बुझिनु प्रभु! तोमार चरण
कदाचित् कालिन्दी-तट-विपिन-सङ्गीतक-रवो
चेतो-दर्पण-मार्जनं भव-महा-दावाग्नि-निर्वापणं
(किब) जय जय गोराचान्देर् आरतिको शोभा
जय जय जगन्नाथ शचीर नन्दन्
(जय) राधा-माधव (जय) कुञ्ज-बिहारी
जय राधे, जय कृष्ण, जय वृन्दावन्
जे आनिलो प्रेम-धन कोरुणा प्रचुर्
दुर्लभ मानब-जन्म लभिया सोंसारे
दुष्ट मन! तुमि किसेर् वैष्णव?
नमस् ते नरसिंहाय
नमामीश्वरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपं
नमो नमः तुलसी कृष्ण-प्रेयसि नमो नमः
नव गौर-वरं नव-पुष्प-शरं
परम कोरुण, पहू दुइ जन
प्रलय-पयोधि-जले धृतवान् असि वेदं
भुलिया तोमारे, संसारे आसिया,
मधुरं मधुरेभ्यो 'पि
मम मन मन्दिरे रहो निशि-दिन्
मानस, देहो, गेहो, जो किछु मोर्
यदि गौर ना होइतो, तबे कि होइतो,
यशोमती-नन्दन, ब्रज-बरो-नागर,
राधा-कृष्ण प्राण मोर जुगल-किशोर
विभावरी शेष, आलोक-प्रवेश,
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु दोया कोरो मोरे
श्री-गुरु-चरण-पद्म, केवल-भकति-सद्म,
सर्वस्व तोमार्, चरणे संपिया,
संसार-दावानल-लीढ-लोक
हरि हे दोयाल् मोर् जय राधा-नाथ्